कट और खरोंच
कट और खरोंच - एक परिचय
कट जाना और खरोंच आना विशेष रूप से बच्चों में खेलते समय में कट जाना, बहुत ही आम होता है और इनमें से अधिकांश, गंभीर नहीं होती है । अच्छी तरह से बुनियादी एंटीसेप्टिक घाव पर लगाने से इसे सावधानी से नियंत्रित किया जा सकता है। एक साधारण से सूक्ष्म घाव और एक बहुत गंभीर घाव का भेद करना जरूरी है। गंभीर घाव की किसी पेशेवर से तत्काल देखभाल और चिकित्सा जरूरी होती है, जबकि साधारण घाव की भी देखभाल जब तक वे ठीक नहीं होजाते जरूरी है, क्यों कि यह कभी भी संक्रमित भी हो सकता है।
कट और खरोंच के आम कारण क्या हैं?
•बच्चों में खेल खेलते समय जबकि त्वचा पर जमीन या दीवार की किसी खुरदरी सतह से रगडे जाने के कारण खरोंच आ जाती है।
•वयस्कों में दुर्घटनाएँ, रसोई में काम करते समय, या सड़क पर हो सकती है।
एक सतही घाव का प्रबंध:
सतही घाव एक छोटा सा कट, लंबाई में आधा इंच से कम, गहरा नहीं, खून सक्रिय रूप से नहीं बह रहा होता है। और किसी भी गंदगी के बिना होता है / चोट की साइट पर कण नहीं होते। ऐसे मामलों में:
•चोट को एक हल्के एंटीसेप्टिक साबुन और गर्म पानी के साथ धोयें।
•घाव पर हवा मत करें। यह बच्चों में एक बहुत ही आम आदत होती है, लेकिन इससे सिर्फ मुंह से रोगाणु घाव पर एकत्र हो सकते हैं।
•एंटीबायोटिक मलहम की एक पतली परत लगाय़ें और कुछ घंटों के लिए हवा के लिए खुला छोड़ दें।
• घाव की कच्ची सतह कुछ सूखी हो जाने के बाद एक छोटी बैंडेज घाव पर लगा देवें,और आप घाव को कम से कम 2-3 दिनों के लिए गीला नहीं करना चाहिये।
किसी गहरा घाव या घाव से रक्त स्राव को रोकने का प्रबंध:
•चेहरे, गर्दन और छाती पर,आधा इंच लंबा एक घाव मध्यम गंभीर होते हैं। कुछ धूल जमी हुई और सक्रिय रक्तस्राव होते रहने पर, ऐसे एक मामले में:
•यदि घाव धूल से मुक्त है, तो एक साफ कपड़े से कसकर / कपास से रक्तस्राव को रोकने के लिए उपाय करें।
•यदि चोट कोई हाथ या पैर लगी हो तो, हृदय के स्तर से अंग को ऊपर करने से रक्तस्राव को रोकने में मदद होती है।
•अस्थिभंग होने पर अंग न हिलायें।
•घाव से खून बहना बंद होने पर, हल्के साबुन और गर्म पानी के साथ चोट को साफ करें, मलें नहीं और पॅट करके सूखायें।
•घाव पर हवा मत करें, इससे वह संक्रमित हो सकता है।
•एंटीबायोटिक मलहम की एक पतली परत लगायें।
•एक पट्टी लगायें।
•यदि खून बहना जारी रहता है, और पट्टी भीग जाती है, इसे कुछ समय के लिए हटाकर पुनःदबाव कर पट्टी लगायें।
•पट्टी भीग जाने पर हर बार बदलें और प्रतिदिन पट्टी बदलने के लिए याद रखें।
आप एक डॉक्टर की सहायता कब लेना चाहिए?
•यदि उपरोक्त उपाय मध्यम चोट में रक्तस्राव को रोकने के लिए आप असफल हो, तो आपको चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। चिकित्सा की तत्काल देखभाल भी इन कई मामले में जरूरी होती है:
•आंखों के पास या चेहरे या खोपड़ी पर एक बड़ा घाव होने पर।
•यह एक पंचर-जैसा घाव इतना अधिक तो खून नहीं बह रहा होता है किन्तु इस प्रकार के घाव में गंभीर संक्रमण हो सकता है, वास्तव में रक्तस्राव एक घाव से बैक्टीरिया को साफ करने में मदद करता है, जबकि इस प्रकार के मामलों में ऐसा नहीं होता।
•एक गंदी या जंग लगी वस्तु से चोट लगने पर । आधा इंच से और अधिक की लंबाई में घाव होने और उपर से उसकी चौड़ाई का आभास नहीं होने पर।
•कोई बाहरी वस्तु जैसे कांच, धातु, या दृढ़ता से चुभ जाने पर।
•किसी घाव का किनारा अलग या टुकड़े होने पर। ऐसे चौड़े खुली चोट के निशान को रोकने के लिए टॉंका देना पड़ सकता है।
•किसी जानवर या एक मनुष्य के द्वारा काटने पर।
•घाव में बहुत गंभीर दर्द होने पर।
•घाव संक्रमित होने पर - सूजन, लाल हो जाने पर,रिसने पर।
•वयस्कों में पिछले 2 वर्षों से अधिक पहले टिटनेस शॉट लिया हो या बच्चों में 5 वर्ष से अधिक की उम्र के बाद टिटनेस दिया जाना चाहिए।
अच्छी हिन्दी में स्वास्थ्य पर लेख कम ही हैं।मेरे द्वारा लिखे और अनुवादित कुछ लेख यहाँ हैं। ब्लॉग में दिये गये लेख सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित है। उद्धरण के लिये अनुमति अनिवार्य है।
Monday, May 3, 2010
कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन (सीपीआर) क्या है?
कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन (सीपीआर) क्या है?
कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन (सीपीआर) हृदायाघात (कार्डियक) के शिकार के लिए कुछ परिस्थितियों, श्वासावरोध में की जाने वाली एक आपात्कालीन चिकित्सा प्रक्रिया है। सीपीआर अस्पताल या समुदाय में या आपातकालीन प्रतिक्रिया में पेशेवर चिकित्सा सहायक द्वारा किया जाता है।
•हालांकि सीपीआर द्वारा हृदय पुनः आरंभ होने की संभावना कम ही रहती है बल्कि इसका उद्देश्य मस्तिष्क और हृदय में, इसके ऊतक की मृत्यु में देरी करने के लिए रक्त और आक्सीजन का प्रवाह बनाए रखने के लिए किया जाता है। इससे स्थायी मस्तिष्क क्षति के बिना एक सफल रिससाइटेशन के लिए संक्षिप्त आशा बनी रहती है।
•सीपीआर हृदायाघात के मरीजों पर प्रयोग किया जाता है। जिससे महत्वपूर्ण अंगों को जीवित रखने के लिए पोषण के रूप में आक्सीजन के साथ रक्त मिलने से कार्डियक आउटपुट चालू रहती है।
2005 में, रिससाइटेशन के लिये अंतर्राष्ट्रीय लायजन समिति द्वारा (आइएलसीओआर), 2005 के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वसम्मति कार्डियोपल्मोनरी और इन परिवर्तनों के आपात्कालीन कार्डियोवेस्कुलर देखभाल की दिशा निर्देश के नये सीपीआर पर प्राथमिक लक्ष्य पर सहमति व्यक्त की है। और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए सीपीआर को सरल करने के लिए कहा गया था। जैसे, रिससाइटेशन की क्षमता को अधिकतम करने के लिए 2005 में ये महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए:
•सभी शिशु (कम से कम एक वर्ष), बच्चे (1 वर्ष तारुण्य के लिए) के लिए और वयस्क (तारुण्य और किशोर) नवजात को छोड़कर पीड़ित के लिए एक सार्वभौमिक सम्पीडन-वेंटिलेशन अनुपात (30:2), की बचाव प्रक्रिया की सिफारिश की है। आयु समूहों के बीच मुख्य अंतर यह है कि छाती दाबने वयस्कों के लिए दो हाथों का प्रयोग किया जाता है, जबकि बच्चों के लिए सिर्फ एक और शिशु के लिए केवल दो अंगुलियों (सूचकांक और मध्यम उंगलियों) का प्रयोग किया जाता है। हालांकि, इस सरलीकरण शुरूआत की गई है, इसे सार्वभौमिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है, और विशेष रूप से स्वास्थ्य प्रदाता पेशेवरों के बीच प्रोटोकॉल में अभी भी भिन्नता हो सकती है।
•बचाव दल पर जोर हटाने के लिये, एक अनुत्तरदायी वयस्क का मूल्यांकन करने के लिए पल्स या संचलन के संकेत के बजाय सीपीआर शुरू करने के लिए सामान्य श्वसन के अभाव को प्रमुख संकेतक के रूप लेना चाहिये।
•जिसमें प्रोटोकॉल से हटकर बचाव दल वयस्क को सीने के सम्पीडन के बिना साँस प्रदान की जाती है जैसे सभी मामलों के सीपीआर किया जाता है।
कार्डियोपल्मोनरी रिससाइटेशन (सीपीआर) हृदायाघात (कार्डियक) के शिकार के लिए कुछ परिस्थितियों, श्वासावरोध में की जाने वाली एक आपात्कालीन चिकित्सा प्रक्रिया है। सीपीआर अस्पताल या समुदाय में या आपातकालीन प्रतिक्रिया में पेशेवर चिकित्सा सहायक द्वारा किया जाता है।
•हालांकि सीपीआर द्वारा हृदय पुनः आरंभ होने की संभावना कम ही रहती है बल्कि इसका उद्देश्य मस्तिष्क और हृदय में, इसके ऊतक की मृत्यु में देरी करने के लिए रक्त और आक्सीजन का प्रवाह बनाए रखने के लिए किया जाता है। इससे स्थायी मस्तिष्क क्षति के बिना एक सफल रिससाइटेशन के लिए संक्षिप्त आशा बनी रहती है।
•सीपीआर हृदायाघात के मरीजों पर प्रयोग किया जाता है। जिससे महत्वपूर्ण अंगों को जीवित रखने के लिए पोषण के रूप में आक्सीजन के साथ रक्त मिलने से कार्डियक आउटपुट चालू रहती है।
2005 में, रिससाइटेशन के लिये अंतर्राष्ट्रीय लायजन समिति द्वारा (आइएलसीओआर), 2005 के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वसम्मति कार्डियोपल्मोनरी और इन परिवर्तनों के आपात्कालीन कार्डियोवेस्कुलर देखभाल की दिशा निर्देश के नये सीपीआर पर प्राथमिक लक्ष्य पर सहमति व्यक्त की है। और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए सीपीआर को सरल करने के लिए कहा गया था। जैसे, रिससाइटेशन की क्षमता को अधिकतम करने के लिए 2005 में ये महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए:
•सभी शिशु (कम से कम एक वर्ष), बच्चे (1 वर्ष तारुण्य के लिए) के लिए और वयस्क (तारुण्य और किशोर) नवजात को छोड़कर पीड़ित के लिए एक सार्वभौमिक सम्पीडन-वेंटिलेशन अनुपात (30:2), की बचाव प्रक्रिया की सिफारिश की है। आयु समूहों के बीच मुख्य अंतर यह है कि छाती दाबने वयस्कों के लिए दो हाथों का प्रयोग किया जाता है, जबकि बच्चों के लिए सिर्फ एक और शिशु के लिए केवल दो अंगुलियों (सूचकांक और मध्यम उंगलियों) का प्रयोग किया जाता है। हालांकि, इस सरलीकरण शुरूआत की गई है, इसे सार्वभौमिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है, और विशेष रूप से स्वास्थ्य प्रदाता पेशेवरों के बीच प्रोटोकॉल में अभी भी भिन्नता हो सकती है।
•बचाव दल पर जोर हटाने के लिये, एक अनुत्तरदायी वयस्क का मूल्यांकन करने के लिए पल्स या संचलन के संकेत के बजाय सीपीआर शुरू करने के लिए सामान्य श्वसन के अभाव को प्रमुख संकेतक के रूप लेना चाहिये।
•जिसमें प्रोटोकॉल से हटकर बचाव दल वयस्क को सीने के सम्पीडन के बिना साँस प्रदान की जाती है जैसे सभी मामलों के सीपीआर किया जाता है।
Sunday, May 2, 2010
कार्डियक टेस्ट (हृदय की जॉंच)
कार्डियक टेस्ट क्या है और कैसे की जाती है?
हृदय की जॉंच इसकी और इससे सम्बन्धित अवयवों की कार्य क्षमता को मापने के लिए की जाती है । हृदय में छिपी हुई असामान्यता का निदान हो जाने से शीघ्र ही उसका इलाज किया जा सकता है । निदान की आवश्यकता और ध्येय के आधार पर निम्न लिखित टेस्ट किये जा सकते हैं -
अक्षत टेस्ट (नॉन-इनवेसिव)
•ई.सी.जी. (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)
•2डी इकोग्राम
•कार्डियक सी.टी.
रक्त परीक्षण -
•कार्डियक एन्जाइम
क्षतकारी टेस्ट (इन्वेसिव) -
•हृदय की एन्जियोग्राफी
•हृदय का परफ्यूजन टेस्ट
ई.सी.जी. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम
•यह नैदानिक परीक्षा सामान्यतः नित्यक्रम में करवाई जाती है ।
•इसे आसानी से कहीं भी किया जा सकता है ।
ई.सी.जी. का उद्देश्य
•हृदय के क्रियाकलाप की एक जॉंच है और इससे ऐसी घटना, जिसे भूत में कभी महसूस किया गया था जो लक्षणहीन घटना हो, उसकी जानकारी मिल जाती है ।
•अचानक छाती में दर्द होने पर हृदयाघात के लक्षणों के लिए किया जाने वाला पहला टेस्ट है ।
•हृदयातिपात (हर्ट फेलयर) से भरती रोगियों को मानिटर करने के लिए एरिदमिया और हृदयगति रूकने पर, अतःस्थि रक्त थक्का (थ्रोम्बालाइसिस) और सभी प्रकार के हृदय रोगियों में इ.सी.जी. की जाती है ।
इसकी तैयारी कैसी की जाती है ?
•कोई विशिष्ट तैयारी की जरूरत नहीं होती, और न ही आहार परिवर्तन की जरूरत होती है ।
•स्त्री को दो टुकड़े के वसन धारण करना चाहिए ताकि उपरी वसन को टेस्ट में निकाल सकें ।
•यदि आप किसी प्रकार की ब्लड प्रेशर की देवा ले रहे हो तो आपको डॉक्टर को सूचना दे देना होगा और विशेषकर यदि आपको पेसमेकर लगा हो तो भी इसकी सूचना दे देवें ।
यह कैसे किया जाता है ?
कपड़े खुला दिये जाते हैं ताकि छाती प्रदर्शित हो सके । छाती पर लीड़ या इलेक्ट्रोड लगाये जाते है जिससे इलेक्ट्रिक रिदम आता है । दायें और बाये पौचों और पैरों पर भी लीड लगाई जाती है । इलेक्ट्रिक संवेदन चमडी से प्रप्ति के लिए संवहनार्थ जैली लगाई जाती है ।
इलेक्ट्रोड को रिकार्ड करने वाली मशीन से जोड दिया जाता है और स्विच खोलने पर यह लम्बी पेपर की पट्टी पर इलेक्ट्रिक संवेदना को रिकार्ड करती है । इस लंबे पेपर की पट्टी पर काले वर्ण से रिकार्डिंग होती है । पूरे तौर पर ई.सी.जी. रिकार्ड करने के बाद मशीन बंद कर दी जाती है । लीड्स निकाल दिये जाते हैं और जैली को पोंछ दिया जाता है ।
इसमें कैसा महसूस होता है ?
•इ.सी.जी. से कोई तकलीफ नहीं होती, नही किसी तरह का टेस्ट किये जाने की संवेदना होती है ।
•जहॉं जैली लगाई जाती है वहॉं ठंडेपन का अहसास होता है, किन्तु किसी तरह का चमड़ी पर कोई असर नहीं होता ।
इसमें क्या खतरा हो सकता है?
यह अत्यन्त सुरक्षित कर्म है, इसमें किसी तरह का खतरा नहीं है । वास्तव में यह हृदय रोगियों के लिए एक उपयोगी टेस्ट है ।
इसके परिणाम क्या दर्शाते हैं ?
•हदय का संवहन सामान्य होने पर सामान्य परिणाम होते हैं, जो हृदय को सामान्य कार्य को दर्शाते हैं ।
•असामान्य ट्रेसिंग को देखकर कई हृदय रोगों का निदान किया जा सकता है । जिन अंशों में इ.सी.जी. ट्रेसिंग में असामान्यता होती है उससे हृदय के उस हिस्से के प्रभावित होने का आभास हो जाता है ।
•आपका डॉक्टर आपकी रिपोर्ट और आपके लक्षणों का संबंध स्थापित कर निदान करता है और आपकी आगे की चिकित्सा बताता है ।
हृदयरोग और इकोकार्डियोग्राम
आपके हृदय की पेशियों, हृदय के वाल्व और हृदय रोगों के खतरों की जॉंच के लिए अल्ट्रासाउण्ड पर आधारित इकोकार्डियोग्राम किया जाता है ।
मुझे इकोकार्डियोग्राम की क्यों जरूरत है?
आपका डॉक्टर इन बातों के लिए इकोकार्डियोग्राम करता है-
•हृदय के पूरे कार्यों का लेखा जोखा जानने ।
•हृदय रोग किस टाईप का है य जानने
•समय बीतने पर हृदय के वाल्व की बीमारी की प्रगति जानने
•औषध या शल्य चिकित्सा के प्रभाव की परीक्षा करने
इकोकार्डियोग्राम के क्या प्रकार हैं?
कई प्रकार के इकोकार्डियोग्राम होते हैं, आपका डॉक्टर आपके लिए कौनसा सहायक होगा, निश्चय करता है ।
•ट्रांस-थोरासिक इकोकार्डियोग्राम : यह सामान्य इकोकार्डियोग्राम होता है । यह एक्सरे की भॉंति वेदना विहिन होता है, किन्तु इसमें विकिरण नहीं होता । इसमें वही तकनीक का उपयोग होता है जो जन्म से पूर्व बच्चे का स्वास्थ्य जॉंचने के लिए किया जाता है । हाथ में उपकरण धारण करते है जिसे ट्रासड्यूसर कहते है। इसे छाती पर रखते हैं, इससे ऊंची फ्रिक्वेंसी की ध्वनि तरंगे निकलती हैं। ये ध्वनि तरंगे हृदय की रचना से टकराकर आती है और एक आकृति बनती है । ध्वनि का उपयोग डॉक्टर हृदय की क्षति और रोग निदान के लिए करते हैं ।
•ट्रांस ईसोफिजियल इकोकार्डियोग्राम (टी.ई.ई.): इस टेस्ट में ट्रांसड्यूसर को गले से इसोफेगस तक पहुँचाया जाता है । इसोफेगस हृदय के पास स्थित होता है । इसलिए फेफड़ो और छाती से बच कर हृदय की स्पष्ट छवि प्राप्त की जा सकती है।
•स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम: इस इकोकार्डियोग्राम को व्यक्ति ट्रेडमिल या स्थिर साइकिल पर व्यायाम कर रहा होता है, तब किया जाता है । इस टेस्ट से हृदय की दिवारों और पंपिंग की क्रिया को देखने में होता है क्योंकि इसमें हृदय तनावग्रस्त रहता है । इसमें हृदय में रक्त संवहन की कमी देखी जा सकती है, जो कि आराम करते समय सामान्य होती है । इकोकार्डियोग्राम व्यायाम शुरु के कुछ पहले या तुरन्त बाद किया जाता है ।
•डोबुटामाइन या एडिनोसिन या सेस्टामिबी स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम : इस प्रकार के इकोकार्डियोग्राम में हृदय के लिए स्ट्रेस का व्यायाम आवश्यक नहीं होता । इसमें दवा से उसी प्रकार की उत्तेजना हृदय में उत्पन की जाती, जिस प्रकार की व्यायाम करने से होती है । यह उन रोगियो में विशेषतः उपयोग होता है जो ट्रेडमिल या स्थिर साइकिल पर व्यायाम नहीं कर पाते । यह आपके हृदय क्षमता को दर्शाता है और आपके कोरिनरी धमनी (आर्टरी) के रोग (धमनी अवरोध) की संभावना को बताता है । यह अक्सर धमनी का अवरोध (एथिरोक्लिरोसिस) की पूरी जानकारी प्रदान करता है ।
मैं इकोकार्डियोग्राम के लिए कैसे तैयार होऊँ?
इकोकार्डियोग्रम किये जाने वाले दिन आप सामान्य खान-पान करें । डॉक्टर के निदेशानुसार उपयुक्त समय पर सभी दवाएँ लें ।
इकोकार्डियोग्राम में क्या होता है?
•इकोकार्डियोग्राम करते समय आपको दवाखाने से दिया गया गाउन पहनना पड़ता है । आपको कमर के ऊपर के वस्त्रों को निकालने को कहा जा सकता है। तीन इलेक्ट्रोड (छोटे चपटे और चिपकने वाले पैच) आपकी छाती पर लगा दिये जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी के मॉनिटर को जोड दिये जाते हैं जो आपके हृदय की क्रियाओं को मापते है ।
•सोनोग्राफर आपको परीक्षा टेबल की बॉंयी ओर सुलाता है । फिर वह एक छड़ी (जिसे साउण्ड वेव ट्रान्सड्यूर कहते हैं) को आपकी छाती पर कई जगह रखता है । छड़ी पर थोड़ा सा जेल लगाया जाता है । इससे आपकी चमड़ी को नुकसान नहीं होता । जेल से साफ छवि मिलने में सहायता भी होती है ।
•ध्वनि डॉपलर सिग्नल का एक भाग है । टेस्ट करते समय आपको ध्वनि सुनाई दे सकती है या नही भी सुनाई दे सकती है । आपको कई बार अपनी स्थिति बदलने को कहा जाता है ताकि हृदय की विभि क्षेत्रों से छवि ली जा सके । परीक्षा करते समय आपको सॉंस थामने को कई बार कहा जा सकता है ।
•टेस्ट करते समय आपको कोई बड़ी तकलीफ नहीं होती, हॉं, ट्रांसड्यूसर पर लगे जेल से थोड़ा ठंडापन लग सकता है और ट्रॉंसड्यूर का छाती पर थोड़ा दबाव पड़ता है ।
•इस टेस्ट को करने में 40 मिनट लगते हैं । टेस्ट के बाद आप अपने वसन धारण कर सकते हैं और अपने दैनिक कर्म कर सकते हैं । आपका डॉक्टर आपके टेस्ट के परिणाम आपसे चर्चा करेंगे ।
स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम के लिए मैं क्या तैयारी करूँ?
•यदि आपको डोबुटामाइन स्ट्रेस इको किया जाना है और आपको पेसमेकर लगा हो तो, आप अपने डॉक्टर से विशिष्ट निदेशों के लिए सम्पर्क करें । टेस्ट के पहले आपके उपकरण को जॉंचा जाएगा ।
•स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम के दिन चार घंटे पूर्व से कुछ खायें-पीयें नहीं । केवल जल पान करें । किसी प्रकार का कैफीन युक्त पदार्थ (कोला, चॉकलेट, कॉफी आदि) न पीयें, न खायें । कैफीन से टेस्ट में परिवर्तन आ सकता है । दवा में भी कैफीन होतो इसके बारे में आपके डॉक्टर, फार्मेसिस्ट या नर्स से इसकी जानकारी लेवें ।
•टेस्ट आरंभ होने के 24 घंटे पहले निम्नलिखित हृदयरोग की दवाएँ न लें अन्यथा आपका डॉक्टर यदि आपको छाती में तकलीफ होती है तो वह आपको इसकी सलाह देता है ।
बेटा ब्लाकर (जैसे टेनार्मिन, लोप्रेसॉर, टॉप्रॉल या इन्डेराल)
आइसोसार्बाइड डाईनाइट्रेट (जैसे आइसोर्डिल, सॉरब्रिट्रेट)
आइसोसार्बाइड मोनोनाइट्रेट(जैसे ईस्मो, इन्ड्यूर, मोनोकेयर)
नाइट्रोग्लीसरीन (जैसे डेपोनिट, निट्रोस्टेट, नाइट्रोपैचेस)
दवा संबंधी किसी प्रकार की शंका डॉक्टर से निवारण करें । डॉक्टर की पूर्व सलाह के बिना दवा कभी बन्द न करें । यदि आप किसी प्रकार का इन्हेलर का उपयोग कर रहे हों तो उसे अपने साथ ले जायें ।
यदि मुझे मधुमेह हो तो क्या करूँ ?
•यदि आप मधुमेह नियंत्रण के लिए इन्सुलिन का प्रयोग कर रहे हो तो टेस्ट वाले दिन कितना इन्सुलिन लेना होगा, इसकी जानकारी डॉक्टर से ले लेंवे । प्रायः डॉक्टर आपको इसकी आधी मात्रा की सलाह देगा और टेस्ट के पूर्व अल्प आहार की सलाह देगा ।
•यदि आप शुगर नियंत्रण के लिए गोली ले रहे हों तो टेस्ट होने तक दवा न लेंवे । मधुमेह की दवा लेकर टेस्ट से पूर्व भोजन का त्याग न करें ।
•यदि आपको पास ग्लूकोज मॉनिटर होतो उसे साथ ले जावें और टेस्ट के पूर्व और पश्चात् टेस्ट कर लेंवे । यदि आपको शुगर लेवल कम दिखाई दे रहा है तो लैब के परिचारक को तुरन्त सुचना देवें ।
•ब्लड शुगर की औषधी टेस्ट के तुरन्त बाद लेने की योजना बनाएँ ।
औषधीयुक्त स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम में क्या होता है ?
•सबसे पहले एक तकनीशियन धीरे से आपकी छाती पर 10 जगहों पर इलेक्ट्रो़ड़ (छोटा, चपटा, चिपकने वाला पैच) रखता है । इलेक्ट्रो़ड़ को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (इसीजी या इकेजी) मानिटर से संबद्ध किय जाता है जो कि आपके हृदय की टेस्ट के दौरान इलेक्ट्रिक क्रिया को अंकित करता है ।
•तकनीशियन विश्रामावस्था में इकोकार्डियोग्राम करता है और आपकी हृदयगति और ब्लड प्रेशर जॉंचता है। आपकी बाहो में एक अन्तःशिरा द्वारा आपके रक्त संचार में सीधी हृदय में एक दवा - डीबुटामाइन प्रवेश कराई जाती है और तकनीशियन निरन्तर इको की छवि देखता रहता है । दवा के द्वारा आपकी हृदयगति व्यायाम अवस्था जितनी बढ़ाई जाती है । और आपको तेज सॉंस आने लगती है । आपको कुछ गर्म फ्लशिंग जैसा और कुछ लोगों को धीमा सिर दर्द हो सकता है ।
•लैब का परिचारक आपको बारबार पूछता रहेगा आपको कैसा लग रहा है। यदि आपको छाती, भुजा या जबड़ों में दर्द या तकलीफ हो, सॉंस तेज हो, चक्कर हो, सिर में हल्का पन हो या किसी प्रकार का सामान्य लक्षण होतो तुरन्त उन्हें कहें।
•किसी प्रकार का भी इसीजी में परिवर्तन वह मॉनीटर में देखते रहता है और टेस्ट रोकने की सालाह देता है । दवा पूरी तरह रक्त में प्रवेश होने पर आपकी अन्तशिरा से निकाल दिया जाता है ।
•इस टेस्ट को 60 मिनिट लगते हैं । अन्तशिरा को 15 मिनिट मे समाप्त कर दिया जाता है । टेस्ट के बाद, आपको रेस्ट रूम में तब तक रखा जाता है जब तक आपके टेस्ट के दौरान उत्प लक्षण पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाते ।
ट्रांस इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम तैयारी कैसे करूँ ?
•इसोफेगस में किसी प्रकार का रोग हो तो डॉक्टर को बताएँ - जैसे हायटस हार्निया, निगलने में तकलीफ या कैंसर
•ट्रान्स इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम टेस्ट के दिन छः घंटे पूर्व कुछ भी न खाएँ या पीयें । डॉक्टर के निर्देशानुसार एक घूंट पानी से साथ नियमित दवा का सेवन कर सकते हैं ।
•मधुमेह के रोगी डॉक्टर के निर्देशानुसार अपनी दवा या इन्सुलिन टेस्ट से पूर्व ले सकते हैं ।
•टेस्ट के लिए अपने साथ किसी को ले जाएँ क्योंकि टेस्ट के बाद आप स्वयं एक दिन तक वाहन चालन न करें । टेस्ट में निद्राकारक औषधी दी जाती है, जिससे उनींदापन, चक्कर और निर्णय करने में असामंजस्य हो सकता है ।
ट्रांस इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम में क्या होता है ?
•ट्रांस इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम के पूर्व आपकी बत्तीसी को निकालना होगा । आपकी बाहों में अंतशिरा द्वारा एक दवा दी जाएगी ।
• सबसे पहले एक तकनीशियन धीरे से आपकी छाती पर 10 जगहों पर इलेक्टोड (छोटा, चपटा, चिपकने वाला पैच) रखता है । इलेक्ट्रो़ड़ को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (इसीजी या इकेजी) मानिटर से संबद्ध किय जाता है जो कि आपके हृदय की टेस्ट के दौरान इलेक्ट्रिक क्रिया को अंकित करता है ।
•टेस्ट के दौरान ब्लड प्रेशर की जॉंच के लिए एक काफ आपकी बाहों में बॉंध दिया जायेगा । एक छोटा क्लिप आपकी अंगुली में लगाया जायेगा, जिसे पल्स ऑक्सीजन से संबद्ध कर दिया जाता है । इससे टेस्ट के दौरान रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा जॉंची जाती है ।
•थोड़ी-सी मात्रा में निद्राकारक औषधी (आपको तनावमुक्त रखने के लिए) अन्तशिरा से दी जाती है । इससे आप टेस्ट को दौरान पूरी तरह से सजग नहीं रहते ।
•मुँह की रिसाव के खींचने के लिए एक डेन्टल सक्शन टिप को मुँह में रखा जाता है । एक पतला सा, स्निग्ध चिकना एन्डोस्कोप (देखने का यंत्र) आपके मुँह में डाला जाता है । गले के नीचे इसोफेगस तक जाता है। सांस लेने में इससे तकलीफ नहीं होती । एण्डोस्कोप नीचे तक जाने में मदद के लिए आपको निगलने को कहा जाता है । टेस्ट यह भाग कुछ सेकण्ड में बिना तकलीफ के समाप्त हो जाता है । एक बार एण्डोस्कोप अपनी जगह पहुँचने पर यह हृदय की अलग-अलग दृष्टि से छवि लेना शुरू कर देता है । टेस्ट के इस भाग का आपको भान नहीं होता ।
•टेस्ट पूरा होने पर ट्यूब निकाल ली जाती है । टेस्ट 10- 30 मिनट में पूरा हो जाता है और फिर आपको 20-30 मिनट तक निरीक्षण में रखा जाता है ।
•टेस्ट के बाद आप घर तक किसी की मदद से जा सकते हैं । अनेस्थिसिया के स्प्रे का प्रभाव समाप्त होने तक या गले में सुनपना कम होने तक कुछ भी खाएँ या पीयें नही । इसे लगभग एक घंटा लग सकता है । आपका डॉक्टर आपके टेस्ट की चर्चा आपसे करेगा ।
हृदय के एन्जाइम का अध्ययन
हृदय के एन्जाइम के अध्ययन में क्रियेटिन फॉस्फोकाइनेज (सीपीक, सीके) और प्रोटीन ट्रोपोलिन (टी एन एल, टी एन टी)के रक्त के स्तर का अध्ययन किया जाता है । इन एन्जाइमों का और प्रोटीन का सामान्यतः रक्त में स्तर कम होता है । किन्तु हृदयाघाट होने पर एन्जाइम और प्रोटीन क्षतिग्रस्त हृदय की पेशियों से लीक होने से रक्त में इनका स्तर बढ़ जाता है ।
चूंकि ये एन्जाइम और प्रोटीन शरीर के अन्य उत्तियों में भी रहते है इसलिए जब ये उत्तियॉं क्षतिग्रस्त होती है तब भी इनका स्तर बढ़ जाता है । इसलिए हृदय के एन्जाइम का अध्ययन करते समय अन्य शारीरिक लक्षणों का विवेचन भी किया जाना आवश्यक है । साथ ही इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम का भी अध्ययन करना चाहिए ।
यह क्यों किया जाता है ?
कार्डियाक एन्जाइम का अध्ययन इन कारणों में करते हैं -
•आपको हृदयाघात का निश्चयीकरण के लिए या आपको छाती के दर्द की शिकायत करने पर, हृदयाघात की शंका (अनस्टेबल एन्जाइना), सॉंस की तेजी, मतली, पसीना और असामान्य इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम होने पर यह किया जाता है ।
•बाइपास सर्जरी के बाद हृदय की चोट की परीक्षा
•किसी हृदय सम्बन्धी कर्म जैसे परक्यूटेनियस कोरोनरी इन्टरवेंशन (पी सी आई) या रक्त के थक्के को घुलने की दवा (ब्रोनोलाइटिक दवा) देने के बाद इससे थक्का सफलता पूर्वक घुलने के सिद्ध करने के लिए ।
इसके लिए कैसे तैयार होऊँ?
•किसी प्रकार की विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती
•कई प्रकार की दवाएँ टेस्ट पर प्रभाव कर सकती है । अपने स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा निर्देशित या अनिर्देशित औषधि सेवन की जानकारी दे देंवे ।
यह कैसे किया जाता है?
जो डॉक्टर आपका रक्त निकालेगा वह
•आपकी बॉंह पर एक इलास्टिक पट्टा बॉंध कर आपका रक्त संचार रोके जाएगा । इससे बॉंह की शिराएँ आसानी से दृष्टिगोचर होंगी जिनमें से रक्त निकालना है ।
•अल्कोहल से उस जगह को साफ किया जाएगा ।
•सूई को शिरा में प्रवेश किया जायेगा । एक से अधिक सूइयों की जरूरत पड़ सकती है ।
•सूई को जिस ट्यूब में रक्त भरना है, उससे जोड़ा जाएगा ।
•पर्याप्त रक्त संग्रह होने पर बैंड को निकाल लिया जाएगा ।
•सूई निकाल कर उसकी जगह गॉज पैड या सूई का फाया रखा जाएगा ।
•उस जगह को दबाकर उस पर बैंडेज लगा दिया जाता है ।
•कई बार तुलना करने के लिए कार्डियक एन्जाइम टेस्ट को कई घंटों तक दोहराया जाता है । हृदयाघात का संदेह होने पर इस टेस्ट को प्रति 8 से 12 घंटे तक 1 से 2 दिन तक एन्जाइम का स्तर घटने और बढ़ने की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है ।
खतरा
शिरा से रक्त का नमूना लेने में बहुत कम ही समस्या हो सकती है, केवल सूई द्वारा छोटी सी खरोंच होती है ।
•रक्त का नमूना लेने के बाद शिरा में सूजन आना दुर्लभ होता है । इसे फ्लेबाइटिस कहा जाता है । दिन में कई बार गर्म सेंक करने से फ्लेबाइटिस की समस्या समाप्त हो जाती है ।
•रक्तस्त्राव सम्बन्धी समस्या रहने पर स्त्राव चालू रह सकता है । एस्पिरिन, और अन्य रक्त को पतला रखने वाली औषधियों से ऐसा हो सकता है । यदि आपको स्राव या रक्त जम की कोई समस्या हो अथवा इसके लिए कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर को इसकी सूचना पहले ही दे देंवे ।
परिणाम
यह टेस्स्ट रक्त में क्रियेटिन फॉस्फोकाइनेस (सीपके,सीके) और प्रोटीन ट्रोपोनिन (टीएनएल, टी एन टी) के स्तर की जॉंच के लिए किया जाता है ।
इसके परिणाम एक घंटे में आ जाते हैं ।
एक लैब से दूसरे लैब के मानकों और इकाइयों में अन्तर हो सकता है । निम्नलिखित सूची आपके सामान्य संदर्भ के लिए है । अपने डॉक्टर या लैब से विशिष्ट मानकों की जानकारी ले लेंवे ।
ट्रोपनिन (टी एन एल और टी एन टी)
सामान्यः टी एन एः 0.3 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से कम
टी एन टी 0.1 माइक्रोग्रा प्रति लीटर से कम
असामान्य: जब आपके हृदय की पेशियॉं क्षत हो जाती है तब सामान्यः स्तर से ट्रोपोनिन बढ़ जाता है । ट्रोपोनिन का रक्त में स्तर हृदयाघात के 4-6 घंटे बाद बढ़ जाता है और 10 से 24 घण्टों में वह अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है । और 10 दिनों में सामान्य स्तर पर आ जाता है ।
टोटल सीपीके (क्रियेटिन फॉस्फोकारनेज)
सामान्यः पुरुषों मेः 55 - 170 अंतर्राष्ट्रीय युनिट प्रति लीटर
स्त्रियों मेः 30 - 135 अंतर्राष्ट्रीय युनिट प्रति लीटर
असामान्यः हृदयाघात के 4-8 घण्टे के भीतर सीपीके का स्तर बढ़ जाता है । 12- 24 घंटे में यह चरम स्तर पर होता है और फिर 3-4 दिन में सामान्य हो जाता है ।
सीपीके -एमवी
सामान्यः 3.0 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर (एन जी /मिली)
टोटल सीपीके का 0%
असामान्यः हृदय की पेशियों में सीपीके -एम वी अधिक मात्रा में होता है जब आपके हृदय की पेशियॉं हृदयाघात से क्षत हो जाती है तब यह 3.0 एन जी / मिली से अधिक हो जाता है । हृदयाघात के 2-6 घंटे बाद यह स्तर बढ़ जाता है 12-24 घंटों में चरम पर होता है और 3 दिन में सामान्य हो जाता है ।
टेस्ट का क्या प्रभाव होता है ?
आपका टेस्ट कब नही किया जा सकता या टेस्ट के परिणाम निम्नलिखित स्थितियों में सहायक नहीं होते -
•अन्य बीमारियों की उपस्थिति जैसे - मस्कुलर डिस्ट्रोफी, कुछ ऑटो इम्यून रोग, रेयी का लक्षण
•अन्य हृदय रोग की कुछ आपात अवस्था में - जैसे सीपीआर, कार्डियोवर्सन या डिफाइब्रिलेशन
•दवाएँ विशेषकर पेशीगत इन्जेक्शन देने पर
•कोलेस्ट्राल रोधक दवाएं सेवन (स्टेटिन)
•अति मदिरापान
•हाल ही में व्यायाम करने पर
•गुर्दे फेल होने पर
•हाल ही में शल्यक्रिया या गंभीर चोट लगने पर
इससे क्या संदर्भ निकलता है?
•कार्डियक एन्जाइम और प्रोटीन के स्तर की तुलना हमेशा आपके लक्षण, वृतान्त, भौतिक परीक्षा और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के परिणामों से की जानी चाहिए ।
•हृदयाघात का निश्चय करने के लिए ट्रोपोनिन एक तुरन्त और सही तरीका है, किन्तु इसका बढ़ने के लिए 6 घंटे लगते है । इसलिए शुरू में यह समान्य रह सकता है । ट्रोपोनिन हृदय की पेशियों के लिए विशिष्ट है और सीपीके की तुलना में रक्त में अधिक समय तक रहता है ।
•सीपीके एमवी क्षत हृदय पेशी में अधिक मात्रा में रहता है और टोटल सीपीके की अपेक्षा एक निश्चित तरीका है । टोटल सीपीके स्तर अति व्यायाम, अन्तपेशी इन्जेक्शन, पेशियों की मार, मस्कूलर डिस्ट्रोफी और पेशीगत सूजन में भी बढ़ सकता है ।
•एक अन्य प्रोटीन, जिसे मायोग्लोबिन कहते हैं, भी हृदयाघात के निदान में उपयोगी हो सकता है ।
कार्डियक टेस्ट क्या है और कैसे की जाती है?
हृदय की जॉंच इसकी और इससे सम्बन्धित अवयवों की कार्य क्षमता को मापने के लिए की जाती है । हृदय में छिपी हुई असामान्यता का निदान हो जाने से शीघ्र ही उसका इलाज किया जा सकता है । निदान की आवश्यकता और ध्येय के आधार पर निम्न लिखित टेस्ट किये जा सकते हैं -
अक्षत टेस्ट (नॉन-इनवेसिव)
•ई.सी.जी. (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)
•2डी इकोग्राम
•कार्डियक सी.टी.
रक्त परीक्षण -
•कार्डियक एन्जाइम
क्षतकारी टेस्ट (इन्वेसिव) -
•हृदय की एन्जियोग्राफी
•हृदय का परफ्यूजन टेस्ट
ई.सी.जी. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम
•यह नैदानिक परीक्षा सामान्यतः नित्यक्रम में करवाई जाती है ।
•इसे आसानी से कहीं भी किया जा सकता है ।
ई.सी.जी. का उद्देश्य
•हृदय के क्रियाकलाप की एक जॉंच है और इससे ऐसी घटना, जिसे भूत में कभी महसूस किया गया था जो लक्षणहीन घटना हो, उसकी जानकारी मिल जाती है ।
•अचानक छाती में दर्द होने पर हृदयाघात के लक्षणों के लिए किया जाने वाला पहला टेस्ट है ।
•हृदयातिपात (हर्ट फेलयर) से भरती रोगियों को मानिटर करने के लिए एरिदमिया और हृदयगति रूकने पर, अतःस्थि रक्त थक्का (थ्रोम्बालाइसिस) और सभी प्रकार के हृदय रोगियों में इ.सी.जी. की जाती है ।
इसकी तैयारी कैसी की जाती है ?
•कोई विशिष्ट तैयारी की जरूरत नहीं होती, और न ही आहार परिवर्तन की जरूरत होती है ।
•स्त्री को दो टुकड़े के वसन धारण करना चाहिए ताकि उपरी वसन को टेस्ट में निकाल सकें ।
•यदि आप किसी प्रकार की ब्लड प्रेशर की देवा ले रहे हो तो आपको डॉक्टर को सूचना दे देना होगा और विशेषकर यदि आपको पेसमेकर लगा हो तो भी इसकी सूचना दे देवें ।
यह कैसे किया जाता है ?
कपड़े खुला दिये जाते हैं ताकि छाती प्रदर्शित हो सके । छाती पर लीड़ या इलेक्ट्रोड लगाये जाते है जिससे इलेक्ट्रिक रिदम आता है । दायें और बाये पौचों और पैरों पर भी लीड लगाई जाती है । इलेक्ट्रिक संवेदन चमडी से प्रप्ति के लिए संवहनार्थ जैली लगाई जाती है ।
इलेक्ट्रोड को रिकार्ड करने वाली मशीन से जोड दिया जाता है और स्विच खोलने पर यह लम्बी पेपर की पट्टी पर इलेक्ट्रिक संवेदना को रिकार्ड करती है । इस लंबे पेपर की पट्टी पर काले वर्ण से रिकार्डिंग होती है । पूरे तौर पर ई.सी.जी. रिकार्ड करने के बाद मशीन बंद कर दी जाती है । लीड्स निकाल दिये जाते हैं और जैली को पोंछ दिया जाता है ।
इसमें कैसा महसूस होता है ?
•इ.सी.जी. से कोई तकलीफ नहीं होती, नही किसी तरह का टेस्ट किये जाने की संवेदना होती है ।
•जहॉं जैली लगाई जाती है वहॉं ठंडेपन का अहसास होता है, किन्तु किसी तरह का चमड़ी पर कोई असर नहीं होता ।
इसमें क्या खतरा हो सकता है?
यह अत्यन्त सुरक्षित कर्म है, इसमें किसी तरह का खतरा नहीं है । वास्तव में यह हृदय रोगियों के लिए एक उपयोगी टेस्ट है ।
इसके परिणाम क्या दर्शाते हैं ?
•हदय का संवहन सामान्य होने पर सामान्य परिणाम होते हैं, जो हृदय को सामान्य कार्य को दर्शाते हैं ।
•असामान्य ट्रेसिंग को देखकर कई हृदय रोगों का निदान किया जा सकता है । जिन अंशों में इ.सी.जी. ट्रेसिंग में असामान्यता होती है उससे हृदय के उस हिस्से के प्रभावित होने का आभास हो जाता है ।
•आपका डॉक्टर आपकी रिपोर्ट और आपके लक्षणों का संबंध स्थापित कर निदान करता है और आपकी आगे की चिकित्सा बताता है ।
हृदयरोग और इकोकार्डियोग्राम
आपके हृदय की पेशियों, हृदय के वाल्व और हृदय रोगों के खतरों की जॉंच के लिए अल्ट्रासाउण्ड पर आधारित इकोकार्डियोग्राम किया जाता है ।
मुझे इकोकार्डियोग्राम की क्यों जरूरत है?
आपका डॉक्टर इन बातों के लिए इकोकार्डियोग्राम करता है-
•हृदय के पूरे कार्यों का लेखा जोखा जानने ।
•हृदय रोग किस टाईप का है य जानने
•समय बीतने पर हृदय के वाल्व की बीमारी की प्रगति जानने
•औषध या शल्य चिकित्सा के प्रभाव की परीक्षा करने
इकोकार्डियोग्राम के क्या प्रकार हैं?
कई प्रकार के इकोकार्डियोग्राम होते हैं, आपका डॉक्टर आपके लिए कौनसा सहायक होगा, निश्चय करता है ।
•ट्रांस-थोरासिक इकोकार्डियोग्राम : यह सामान्य इकोकार्डियोग्राम होता है । यह एक्सरे की भॉंति वेदना विहिन होता है, किन्तु इसमें विकिरण नहीं होता । इसमें वही तकनीक का उपयोग होता है जो जन्म से पूर्व बच्चे का स्वास्थ्य जॉंचने के लिए किया जाता है । हाथ में उपकरण धारण करते है जिसे ट्रासड्यूसर कहते है। इसे छाती पर रखते हैं, इससे ऊंची फ्रिक्वेंसी की ध्वनि तरंगे निकलती हैं। ये ध्वनि तरंगे हृदय की रचना से टकराकर आती है और एक आकृति बनती है । ध्वनि का उपयोग डॉक्टर हृदय की क्षति और रोग निदान के लिए करते हैं ।
•ट्रांस ईसोफिजियल इकोकार्डियोग्राम (टी.ई.ई.): इस टेस्ट में ट्रांसड्यूसर को गले से इसोफेगस तक पहुँचाया जाता है । इसोफेगस हृदय के पास स्थित होता है । इसलिए फेफड़ो और छाती से बच कर हृदय की स्पष्ट छवि प्राप्त की जा सकती है।
•स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम: इस इकोकार्डियोग्राम को व्यक्ति ट्रेडमिल या स्थिर साइकिल पर व्यायाम कर रहा होता है, तब किया जाता है । इस टेस्ट से हृदय की दिवारों और पंपिंग की क्रिया को देखने में होता है क्योंकि इसमें हृदय तनावग्रस्त रहता है । इसमें हृदय में रक्त संवहन की कमी देखी जा सकती है, जो कि आराम करते समय सामान्य होती है । इकोकार्डियोग्राम व्यायाम शुरु के कुछ पहले या तुरन्त बाद किया जाता है ।
•डोबुटामाइन या एडिनोसिन या सेस्टामिबी स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम : इस प्रकार के इकोकार्डियोग्राम में हृदय के लिए स्ट्रेस का व्यायाम आवश्यक नहीं होता । इसमें दवा से उसी प्रकार की उत्तेजना हृदय में उत्पन की जाती, जिस प्रकार की व्यायाम करने से होती है । यह उन रोगियो में विशेषतः उपयोग होता है जो ट्रेडमिल या स्थिर साइकिल पर व्यायाम नहीं कर पाते । यह आपके हृदय क्षमता को दर्शाता है और आपके कोरिनरी धमनी (आर्टरी) के रोग (धमनी अवरोध) की संभावना को बताता है । यह अक्सर धमनी का अवरोध (एथिरोक्लिरोसिस) की पूरी जानकारी प्रदान करता है ।
मैं इकोकार्डियोग्राम के लिए कैसे तैयार होऊँ?
इकोकार्डियोग्रम किये जाने वाले दिन आप सामान्य खान-पान करें । डॉक्टर के निदेशानुसार उपयुक्त समय पर सभी दवाएँ लें ।
इकोकार्डियोग्राम में क्या होता है?
•इकोकार्डियोग्राम करते समय आपको दवाखाने से दिया गया गाउन पहनना पड़ता है । आपको कमर के ऊपर के वस्त्रों को निकालने को कहा जा सकता है। तीन इलेक्ट्रोड (छोटे चपटे और चिपकने वाले पैच) आपकी छाती पर लगा दिये जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी के मॉनिटर को जोड दिये जाते हैं जो आपके हृदय की क्रियाओं को मापते है ।
•सोनोग्राफर आपको परीक्षा टेबल की बॉंयी ओर सुलाता है । फिर वह एक छड़ी (जिसे साउण्ड वेव ट्रान्सड्यूर कहते हैं) को आपकी छाती पर कई जगह रखता है । छड़ी पर थोड़ा सा जेल लगाया जाता है । इससे आपकी चमड़ी को नुकसान नहीं होता । जेल से साफ छवि मिलने में सहायता भी होती है ।
•ध्वनि डॉपलर सिग्नल का एक भाग है । टेस्ट करते समय आपको ध्वनि सुनाई दे सकती है या नही भी सुनाई दे सकती है । आपको कई बार अपनी स्थिति बदलने को कहा जाता है ताकि हृदय की विभि क्षेत्रों से छवि ली जा सके । परीक्षा करते समय आपको सॉंस थामने को कई बार कहा जा सकता है ।
•टेस्ट करते समय आपको कोई बड़ी तकलीफ नहीं होती, हॉं, ट्रांसड्यूसर पर लगे जेल से थोड़ा ठंडापन लग सकता है और ट्रॉंसड्यूर का छाती पर थोड़ा दबाव पड़ता है ।
•इस टेस्ट को करने में 40 मिनट लगते हैं । टेस्ट के बाद आप अपने वसन धारण कर सकते हैं और अपने दैनिक कर्म कर सकते हैं । आपका डॉक्टर आपके टेस्ट के परिणाम आपसे चर्चा करेंगे ।
स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम के लिए मैं क्या तैयारी करूँ?
•यदि आपको डोबुटामाइन स्ट्रेस इको किया जाना है और आपको पेसमेकर लगा हो तो, आप अपने डॉक्टर से विशिष्ट निदेशों के लिए सम्पर्क करें । टेस्ट के पहले आपके उपकरण को जॉंचा जाएगा ।
•स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम के दिन चार घंटे पूर्व से कुछ खायें-पीयें नहीं । केवल जल पान करें । किसी प्रकार का कैफीन युक्त पदार्थ (कोला, चॉकलेट, कॉफी आदि) न पीयें, न खायें । कैफीन से टेस्ट में परिवर्तन आ सकता है । दवा में भी कैफीन होतो इसके बारे में आपके डॉक्टर, फार्मेसिस्ट या नर्स से इसकी जानकारी लेवें ।
•टेस्ट आरंभ होने के 24 घंटे पहले निम्नलिखित हृदयरोग की दवाएँ न लें अन्यथा आपका डॉक्टर यदि आपको छाती में तकलीफ होती है तो वह आपको इसकी सलाह देता है ।
बेटा ब्लाकर (जैसे टेनार्मिन, लोप्रेसॉर, टॉप्रॉल या इन्डेराल)
आइसोसार्बाइड डाईनाइट्रेट (जैसे आइसोर्डिल, सॉरब्रिट्रेट)
आइसोसार्बाइड मोनोनाइट्रेट(जैसे ईस्मो, इन्ड्यूर, मोनोकेयर)
नाइट्रोग्लीसरीन (जैसे डेपोनिट, निट्रोस्टेट, नाइट्रोपैचेस)
दवा संबंधी किसी प्रकार की शंका डॉक्टर से निवारण करें । डॉक्टर की पूर्व सलाह के बिना दवा कभी बन्द न करें । यदि आप किसी प्रकार का इन्हेलर का उपयोग कर रहे हों तो उसे अपने साथ ले जायें ।
यदि मुझे मधुमेह हो तो क्या करूँ ?
•यदि आप मधुमेह नियंत्रण के लिए इन्सुलिन का प्रयोग कर रहे हो तो टेस्ट वाले दिन कितना इन्सुलिन लेना होगा, इसकी जानकारी डॉक्टर से ले लेंवे । प्रायः डॉक्टर आपको इसकी आधी मात्रा की सलाह देगा और टेस्ट के पूर्व अल्प आहार की सलाह देगा ।
•यदि आप शुगर नियंत्रण के लिए गोली ले रहे हों तो टेस्ट होने तक दवा न लेंवे । मधुमेह की दवा लेकर टेस्ट से पूर्व भोजन का त्याग न करें ।
•यदि आपको पास ग्लूकोज मॉनिटर होतो उसे साथ ले जावें और टेस्ट के पूर्व और पश्चात् टेस्ट कर लेंवे । यदि आपको शुगर लेवल कम दिखाई दे रहा है तो लैब के परिचारक को तुरन्त सुचना देवें ।
•ब्लड शुगर की औषधी टेस्ट के तुरन्त बाद लेने की योजना बनाएँ ।
औषधीयुक्त स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम में क्या होता है ?
•सबसे पहले एक तकनीशियन धीरे से आपकी छाती पर 10 जगहों पर इलेक्ट्रो़ड़ (छोटा, चपटा, चिपकने वाला पैच) रखता है । इलेक्ट्रो़ड़ को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (इसीजी या इकेजी) मानिटर से संबद्ध किय जाता है जो कि आपके हृदय की टेस्ट के दौरान इलेक्ट्रिक क्रिया को अंकित करता है ।
•तकनीशियन विश्रामावस्था में इकोकार्डियोग्राम करता है और आपकी हृदयगति और ब्लड प्रेशर जॉंचता है। आपकी बाहो में एक अन्तःशिरा द्वारा आपके रक्त संचार में सीधी हृदय में एक दवा - डीबुटामाइन प्रवेश कराई जाती है और तकनीशियन निरन्तर इको की छवि देखता रहता है । दवा के द्वारा आपकी हृदयगति व्यायाम अवस्था जितनी बढ़ाई जाती है । और आपको तेज सॉंस आने लगती है । आपको कुछ गर्म फ्लशिंग जैसा और कुछ लोगों को धीमा सिर दर्द हो सकता है ।
•लैब का परिचारक आपको बारबार पूछता रहेगा आपको कैसा लग रहा है। यदि आपको छाती, भुजा या जबड़ों में दर्द या तकलीफ हो, सॉंस तेज हो, चक्कर हो, सिर में हल्का पन हो या किसी प्रकार का सामान्य लक्षण होतो तुरन्त उन्हें कहें।
•किसी प्रकार का भी इसीजी में परिवर्तन वह मॉनीटर में देखते रहता है और टेस्ट रोकने की सालाह देता है । दवा पूरी तरह रक्त में प्रवेश होने पर आपकी अन्तशिरा से निकाल दिया जाता है ।
•इस टेस्ट को 60 मिनिट लगते हैं । अन्तशिरा को 15 मिनिट मे समाप्त कर दिया जाता है । टेस्ट के बाद, आपको रेस्ट रूम में तब तक रखा जाता है जब तक आपके टेस्ट के दौरान उत्प लक्षण पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाते ।
ट्रांस इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम तैयारी कैसे करूँ ?
•इसोफेगस में किसी प्रकार का रोग हो तो डॉक्टर को बताएँ - जैसे हायटस हार्निया, निगलने में तकलीफ या कैंसर
•ट्रान्स इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम टेस्ट के दिन छः घंटे पूर्व कुछ भी न खाएँ या पीयें । डॉक्टर के निर्देशानुसार एक घूंट पानी से साथ नियमित दवा का सेवन कर सकते हैं ।
•मधुमेह के रोगी डॉक्टर के निर्देशानुसार अपनी दवा या इन्सुलिन टेस्ट से पूर्व ले सकते हैं ।
•टेस्ट के लिए अपने साथ किसी को ले जाएँ क्योंकि टेस्ट के बाद आप स्वयं एक दिन तक वाहन चालन न करें । टेस्ट में निद्राकारक औषधी दी जाती है, जिससे उनींदापन, चक्कर और निर्णय करने में असामंजस्य हो सकता है ।
ट्रांस इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम में क्या होता है ?
•ट्रांस इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम के पूर्व आपकी बत्तीसी को निकालना होगा । आपकी बाहों में अंतशिरा द्वारा एक दवा दी जाएगी ।
• सबसे पहले एक तकनीशियन धीरे से आपकी छाती पर 10 जगहों पर इलेक्टोड (छोटा, चपटा, चिपकने वाला पैच) रखता है । इलेक्ट्रो़ड़ को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (इसीजी या इकेजी) मानिटर से संबद्ध किय जाता है जो कि आपके हृदय की टेस्ट के दौरान इलेक्ट्रिक क्रिया को अंकित करता है ।
•टेस्ट के दौरान ब्लड प्रेशर की जॉंच के लिए एक काफ आपकी बाहों में बॉंध दिया जायेगा । एक छोटा क्लिप आपकी अंगुली में लगाया जायेगा, जिसे पल्स ऑक्सीजन से संबद्ध कर दिया जाता है । इससे टेस्ट के दौरान रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा जॉंची जाती है ।
•थोड़ी-सी मात्रा में निद्राकारक औषधी (आपको तनावमुक्त रखने के लिए) अन्तशिरा से दी जाती है । इससे आप टेस्ट को दौरान पूरी तरह से सजग नहीं रहते ।
•मुँह की रिसाव के खींचने के लिए एक डेन्टल सक्शन टिप को मुँह में रखा जाता है । एक पतला सा, स्निग्ध चिकना एन्डोस्कोप (देखने का यंत्र) आपके मुँह में डाला जाता है । गले के नीचे इसोफेगस तक जाता है। सांस लेने में इससे तकलीफ नहीं होती । एण्डोस्कोप नीचे तक जाने में मदद के लिए आपको निगलने को कहा जाता है । टेस्ट यह भाग कुछ सेकण्ड में बिना तकलीफ के समाप्त हो जाता है । एक बार एण्डोस्कोप अपनी जगह पहुँचने पर यह हृदय की अलग-अलग दृष्टि से छवि लेना शुरू कर देता है । टेस्ट के इस भाग का आपको भान नहीं होता ।
•टेस्ट पूरा होने पर ट्यूब निकाल ली जाती है । टेस्ट 10- 30 मिनट में पूरा हो जाता है और फिर आपको 20-30 मिनट तक निरीक्षण में रखा जाता है ।
•टेस्ट के बाद आप घर तक किसी की मदद से जा सकते हैं । अनेस्थिसिया के स्प्रे का प्रभाव समाप्त होने तक या गले में सुनपना कम होने तक कुछ भी खाएँ या पीयें नही । इसे लगभग एक घंटा लग सकता है । आपका डॉक्टर आपके टेस्ट की चर्चा आपसे करेगा ।
हृदय के एन्जाइम का अध्ययन
हृदय के एन्जाइम के अध्ययन में क्रियेटिन फॉस्फोकाइनेज (सीपीक, सीके) और प्रोटीन ट्रोपोलिन (टी एन एल, टी एन टी)के रक्त के स्तर का अध्ययन किया जाता है । इन एन्जाइमों का और प्रोटीन का सामान्यतः रक्त में स्तर कम होता है । किन्तु हृदयाघाट होने पर एन्जाइम और प्रोटीन क्षतिग्रस्त हृदय की पेशियों से लीक होने से रक्त में इनका स्तर बढ़ जाता है ।
चूंकि ये एन्जाइम और प्रोटीन शरीर के अन्य उत्तियों में भी रहते है इसलिए जब ये उत्तियॉं क्षतिग्रस्त होती है तब भी इनका स्तर बढ़ जाता है । इसलिए हृदय के एन्जाइम का अध्ययन करते समय अन्य शारीरिक लक्षणों का विवेचन भी किया जाना आवश्यक है । साथ ही इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम का भी अध्ययन करना चाहिए ।
यह क्यों किया जाता है ?
कार्डियाक एन्जाइम का अध्ययन इन कारणों में करते हैं -
•आपको हृदयाघात का निश्चयीकरण के लिए या आपको छाती के दर्द की शिकायत करने पर, हृदयाघात की शंका (अनस्टेबल एन्जाइना), सॉंस की तेजी, मतली, पसीना और असामान्य इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम होने पर यह किया जाता है ।
•बाइपास सर्जरी के बाद हृदय की चोट की परीक्षा
•किसी हृदय सम्बन्धी कर्म जैसे परक्यूटेनियस कोरोनरी इन्टरवेंशन (पी सी आई) या रक्त के थक्के को घुलने की दवा (ब्रोनोलाइटिक दवा) देने के बाद इससे थक्का सफलता पूर्वक घुलने के सिद्ध करने के लिए ।
इसके लिए कैसे तैयार होऊँ?
•किसी प्रकार की विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती
•कई प्रकार की दवाएँ टेस्ट पर प्रभाव कर सकती है । अपने स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा निर्देशित या अनिर्देशित औषधि सेवन की जानकारी दे देंवे ।
यह कैसे किया जाता है?
जो डॉक्टर आपका रक्त निकालेगा वह
•आपकी बॉंह पर एक इलास्टिक पट्टा बॉंध कर आपका रक्त संचार रोके जाएगा । इससे बॉंह की शिराएँ आसानी से दृष्टिगोचर होंगी जिनमें से रक्त निकालना है ।
•अल्कोहल से उस जगह को साफ किया जाएगा ।
•सूई को शिरा में प्रवेश किया जायेगा । एक से अधिक सूइयों की जरूरत पड़ सकती है ।
•सूई को जिस ट्यूब में रक्त भरना है, उससे जोड़ा जाएगा ।
•पर्याप्त रक्त संग्रह होने पर बैंड को निकाल लिया जाएगा ।
•सूई निकाल कर उसकी जगह गॉज पैड या सूई का फाया रखा जाएगा ।
•उस जगह को दबाकर उस पर बैंडेज लगा दिया जाता है ।
•कई बार तुलना करने के लिए कार्डियक एन्जाइम टेस्ट को कई घंटों तक दोहराया जाता है । हृदयाघात का संदेह होने पर इस टेस्ट को प्रति 8 से 12 घंटे तक 1 से 2 दिन तक एन्जाइम का स्तर घटने और बढ़ने की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है ।
खतरा
शिरा से रक्त का नमूना लेने में बहुत कम ही समस्या हो सकती है, केवल सूई द्वारा छोटी सी खरोंच होती है ।
•रक्त का नमूना लेने के बाद शिरा में सूजन आना दुर्लभ होता है । इसे फ्लेबाइटिस कहा जाता है । दिन में कई बार गर्म सेंक करने से फ्लेबाइटिस की समस्या समाप्त हो जाती है ।
•रक्तस्त्राव सम्बन्धी समस्या रहने पर स्त्राव चालू रह सकता है । एस्पिरिन, और अन्य रक्त को पतला रखने वाली औषधियों से ऐसा हो सकता है । यदि आपको स्राव या रक्त जम की कोई समस्या हो अथवा इसके लिए कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर को इसकी सूचना पहले ही दे देंवे ।
परिणाम
यह टेस्स्ट रक्त में क्रियेटिन फॉस्फोकाइनेस (सीपके,सीके) और प्रोटीन ट्रोपोनिन (टीएनएल, टी एन टी) के स्तर की जॉंच के लिए किया जाता है ।
इसके परिणाम एक घंटे में आ जाते हैं ।
एक लैब से दूसरे लैब के मानकों और इकाइयों में अन्तर हो सकता है । निम्नलिखित सूची आपके सामान्य संदर्भ के लिए है । अपने डॉक्टर या लैब से विशिष्ट मानकों की जानकारी ले लेंवे ।
ट्रोपनिन (टी एन एल और टी एन टी)
सामान्यः टी एन एः 0.3 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से कम
टी एन टी 0.1 माइक्रोग्रा प्रति लीटर से कम
असामान्य: जब आपके हृदय की पेशियॉं क्षत हो जाती है तब सामान्यः स्तर से ट्रोपोनिन बढ़ जाता है । ट्रोपोनिन का रक्त में स्तर हृदयाघात के 4-6 घंटे बाद बढ़ जाता है और 10 से 24 घण्टों में वह अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है । और 10 दिनों में सामान्य स्तर पर आ जाता है ।
टोटल सीपीके (क्रियेटिन फॉस्फोकारनेज)
सामान्यः पुरुषों मेः 55 - 170 अंतर्राष्ट्रीय युनिट प्रति लीटर
स्त्रियों मेः 30 - 135 अंतर्राष्ट्रीय युनिट प्रति लीटर
असामान्यः हृदयाघात के 4-8 घण्टे के भीतर सीपीके का स्तर बढ़ जाता है । 12- 24 घंटे में यह चरम स्तर पर होता है और फिर 3-4 दिन में सामान्य हो जाता है ।
सीपीके -एमवी
सामान्यः 3.0 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर (एन जी /मिली)
टोटल सीपीके का 0%
असामान्यः हृदय की पेशियों में सीपीके -एम वी अधिक मात्रा में होता है जब आपके हृदय की पेशियॉं हृदयाघात से क्षत हो जाती है तब यह 3.0 एन जी / मिली से अधिक हो जाता है । हृदयाघात के 2-6 घंटे बाद यह स्तर बढ़ जाता है 12-24 घंटों में चरम पर होता है और 3 दिन में सामान्य हो जाता है ।
टेस्ट का क्या प्रभाव होता है ?
आपका टेस्ट कब नही किया जा सकता या टेस्ट के परिणाम निम्नलिखित स्थितियों में सहायक नहीं होते -
•अन्य बीमारियों की उपस्थिति जैसे - मस्कुलर डिस्ट्रोफी, कुछ ऑटो इम्यून रोग, रेयी का लक्षण
•अन्य हृदय रोग की कुछ आपात अवस्था में - जैसे सीपीआर, कार्डियोवर्सन या डिफाइब्रिलेशन
•दवाएँ विशेषकर पेशीगत इन्जेक्शन देने पर
•कोलेस्ट्राल रोधक दवाएं सेवन (स्टेटिन)
•अति मदिरापान
•हाल ही में व्यायाम करने पर
•गुर्दे फेल होने पर
•हाल ही में शल्यक्रिया या गंभीर चोट लगने पर
इससे क्या संदर्भ निकलता है?
•कार्डियक एन्जाइम और प्रोटीन के स्तर की तुलना हमेशा आपके लक्षण, वृतान्त, भौतिक परीक्षा और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के परिणामों से की जानी चाहिए ।
•हृदयाघात का निश्चय करने के लिए ट्रोपोनिन एक तुरन्त और सही तरीका है, किन्तु इसका बढ़ने के लिए 6 घंटे लगते है । इसलिए शुरू में यह समान्य रह सकता है । ट्रोपोनिन हृदय की पेशियों के लिए विशिष्ट है और सीपीके की तुलना में रक्त में अधिक समय तक रहता है ।
•सीपीके एमवी क्षत हृदय पेशी में अधिक मात्रा में रहता है और टोटल सीपीके की अपेक्षा एक निश्चित तरीका है । टोटल सीपीके स्तर अति व्यायाम, अन्तपेशी इन्जेक्शन, पेशियों की मार, मस्कूलर डिस्ट्रोफी और पेशीगत सूजन में भी बढ़ सकता है ।
•एक अन्य प्रोटीन, जिसे मायोग्लोबिन कहते हैं, भी हृदयाघात के निदान में उपयोगी हो सकता है ।
सर्जरी से पहले
सर्जरी के पहले
सर्जरी के नाम से डरते क्यों है?
आपकी या आपके परिचित की सर्जरी होने से भी आप डर जाते हैं । बेहोश किये जाने की कल्पना, पता नहीं कैसे और क्या किया जायेगा? परिणाम की आशंका, आपरेशन के बाद होने वाली पीड़ा और लोगों पर आश्रित रहना आदि विषयों से लोग सर्जरी टालने की कोशिश करते हैं । इसके अतिरिक्त, पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही एक आदत सी है, ऐसी धारणा है कि अक्सर सर्जरी की नौबत किसी भी स्वास्थ्य समस्या का अन्तिम परिहार है ।
यद्यपि विस्तृत अनुसंधान के बाद अब नयी सर्जिकल तकनीक का विकास हुआ है । अब सर्जरी अन्तिम उपाय नहीं रही बल्कि अब रोग निवारणार्थ भी सर्जरी होती है । सर्जरी से अब कुछ चिरकालीन रोगों को समाप्त कर लक्षणों से अच्छा आराम मिल सकता है । वास्तव में इससे नया जीवन मिल जाता है । जैसे घुटने बदलकर आप उम्र में कई साल युवा बन सकते हैं .... आँखों का कैटरेक्ट का ऑप्रेशन करवाकर ... हृदय में स्टेंट लगाकर.... आप उम्र को 25 साल पीछे कर सकते हैं । ऐसे कई उदाहरण है ।
कई लोग सिर्फ आशंका के घेरे में घिर कर और सही सूचना के अभाव में सर्जरी को टालते है जो कि लंबे समय में महत्वपूर्ण होती है । यदि लोगों को यह मालूम हो कि सर्जरी क्यों और कैसे की जाती है, इसकी हाल ही में हुई प्रगति क्या है और आपको क्या किया जाने वाला है इसकी पूरी जानकारी और इसके परिणाम और आपका स्वास्थ्य लाभ कैसा होगा? इन सब सूचना के आधार पर आपकी जीत हो सकती है । जिन रोगियों में शिक्षित, प्रशिक्षित, सूचित करके सर्जरी के लिए तैयार किया जाता है । उनमें स्वास्थ्य लाभ शीघ्र होता देखा गया है ।
ऑप्रेशन के पहले आप इन बातों को सर्जन से पूछें -
1.पूछिये, यह ऑप्रेशन क्यों किया जा रहा है । आपका डॉक्टर आपको संक्षिप्त में समझाएगा और इसके परिणामों की जानकारी देगा । जैसा कि यदि आपका वाल्व परिवर्तन करना होतो वह बतायेगा कि या कृत्रिम वाल्व से आपके हृदय में रक्त का संचार अच्छा रहेगा, इससे हृदय का प्राकृतिक काम हो सकेगा आदि ।
2.आपको सर्जरी से क्या आशाएँ है यह समझ लें और इसकी सीमाएँ क्या हैं? अपने डॉक्टर से पूछे कि आपकी बीमारी कितनी ठीक हो सकती है और इसका प्रभाव कब तक रह सकता है ? जैसे एपेंडिक्स की सर्जरी करके उसे निकाल देने पर पुनः नहीं होता । घुटने परिवर्तन करने पर प्रोस्थेसिस की अवधि 8-10 वर्ष तक होती है । इसके बाद पुनः सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है ।
3. ऑपरेशन के आशान्वित खतरे क्या हो सकते हैं? सर्जरी की जटिलता और रोगावस्था को देखते हुए इसके उपद्रवों की कल्पना और ये उपद्रव होने पर इसकी व्यवस्था और सावधानियों की जानकारी होनी चाहिए । जैसे हिस्टेरेक्टॉमी में गर्भाशय में फायब्रायड होने पर गर्भाशय को निकाल दिया जाता है । इस ऑप्रेशन में चूंकि गर्भाशय में रक्ताधिक्य अधिक होता है उससे अधिक रक्त का रिसाव हो सकता है । ऐसी अवस्था में यदि रोगी का रक्त ग्रूप दुर्लभ, जैसे - ओ निगेटिव हो तो, एक युक्तिसंगत सावधानी है कि ऑटोलोगस ब्लड ट्रान्सफ्यूजन (रक्तदान करवाकर तैयार रखना) अथवा आपात स्थिति में जहॉं रक्त उपलब्ध होता है, उन्हें तैयार रखना।
4.सर्जरी के विकल्प क्या हो सकते हैं? यद्यपि कुछेक अवस्थाओं में सर्जरी करवाना अनिवार्य होता है फिर भी चिकित्सा विज्ञान की हाल ही की प्रगति में कई अवस्थाओं के लिए सर्जरी का विकल्प भी हो सकता है । यदि आप इन्टरनेट द्वारा आपकी अवस्था की नवीनतम उपचार की जानकारी प्राप्त कर पाते हैं तो आपकी मदद हो सकती है । जैसे लैप्रोस्कोपी इसका श्रेष्ठ उदाहरण है, जिसमें सर्जरी की अल्पतम क्षति, ऑप्रेशन के बाद शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और चमड़ी पर घाव का निशान नगण्य होता है ।
5.यदि आप सर्जरी नहीं करवाते तो क्या हो सकता है? सर्जरी करवाने के पूर्व अपने डॉक्टर से इसकी चर्चा कर लें । विशेषतः, यदि आप प्रौढ़ हैं और आपको अन्य समस्याएँ भी है जिससे सर्जरी के बाद कुछ समस्या आ सकती है या आपकी पहले भी सर्जरी हो चुकी हो या क्या आप सर्जरी को कुछ दिन स्थगित करना चाहते हों । उदाहरणार्थ - यदि आपकी उम्र 60 वर्ष की हो और आपको जोड़ों और कूल्हों में दर्द हो ऐसी स्थिति में आप सर्जरी से बचना चाहते हैं और आप अपने लक्षणों को डीएमएआरडी प्रबन्धन करें ।
6.आपको किस प्रकार का एनेस्थिया दिया जाएगा? उसकी जानकारी जरूरी है । सर्जरी के दौरान आप होश में होंगे या बेहोश में हो तो आप मानसिक रूप से तैयार रहेंगे । यदि आपके परिवार में किसी को एनेस्थेसिया से एलर्जी हो तो डॉक्टर को पहले ही बता दें, ताकि इसकी टेस्ट द्वारा जॉंच करने की व्यवस्था की जा सके ।
7.सर्जरी में खर्च कितना आयेगा? आपको यह मालूम होना चाहिए कि सर्जरी के अलावा भी अन्य खर्च होते हैं । जैसे दवा का खर्च, सर्जिकल मटेरियल का खर्च, अस्पताल का किराया, संभवित अतिरिक्त कंसल्टेशन फीस आदि । एक संभावित लगभग खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है । यदि आपका बीमा नहीं हो तो सर्जरी के अप्रत्याशित खर्च अपनी जेब से देना पड़ता है । यदि आर्थिक रूप से आप तैयार नहीं हो तो इसकी तकलीफ आपके पूरे परिवार को भुगतनी पड़ सकती है ।
8.ऑप्रेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ में कितने दिन लग सकते हैं? आपको सर्जरी के बाद कितने दिन अस्पताल में रहना पड़ सकता है जान लेना चाहिए । आप कब से चल फिर सकते हैं, आपको पूरी तरह से पुनर्स्थापित होने कितना समय लगेगा ? आपको अपनी ड्यूटी की व्यवस्था करना पड़ेगा ?
9.आपके डॉक्टर द्वारा अन्य रोगियों पर की गयी सर्जरी की सांख्यिकी क्या है? आपको यह जानकर विश्वास बढ़ेगा कि आपके डॉक्टर ने अब तक आप जैसे कितने ऑप्रेशन किये हैं ? और उनका कितने लोगों में अच्छा परिणाम निकला है ? कुछ डॉक्टर तो पूर्व रोगियों के सम्पर्क में रहते हैं । पुस्तकों से अधिक प्रैक्टिस से अनुभव होता है ।
10.आप दूसरा परामर्श कैसे ले सकते हैं? और आपके डॉक्टर का क्वालिफिकेशन क्या है ?
दूसरा परामर्श लेने का मतलब है आपको आपके डॉक्टर के प्रति संदेह है । किन्तु आप इससे संबंधित विशेषज्ञ से आपकी समस्या की अन्दरूनी जानकारी ले सकते हैं । ताकि आपको पता चल सके कि आप सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा करवा रहे हैं । डॉक्टर की क्वालिफिकेशन की जानकारी लेने से आपको संतोष होता है कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं । दूसरी सलाह लेना हो तो उससे बड़े विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए । ताकि आपको और अधिक विस्तृत जानकारी मिल सके ।
सर्जरी के नाम से डरते क्यों है?
सर्जरी के प्रकार
सर्जरी की सामान्य श्रेणियॉं हैं - आपातकालिक, उपक्रम के प्रकार, शरीर संस्थान, क्षति की मात्रा और विशेष उपकरण उपयोग ।
•इलेक्टिव सर्जरी - यह किसी अजोखिम रोग में की जाती है और रोगी की प्रार्थना पर की जाती है इसमें सर्जन की उपलब्धता और सुविधा देखी जाती है ।
•आपातकालिक सर्जरी - यह जीवन रक्षक सर्जरी है, जो शीघ्र करवानी पड़ती है ।
•एक्सप्लोरेटोरी सर्जरी - यह किसी रोग के निदान के लिए की जाती है ।
•थेरैप्टिक सर्जरी - यह पहले से निदान किये गये रोग की चिकित्सा के लिए की जाती है ।
•एम्प्यूटेशन - यह शरीर के एक भाग प्रायः हाथ, पैर या अंगुली को काटने के लिए की जाती है ।
•इप्लांटेशन - इसमें शरीर के अवयव को फिर से जोड़ा जाता है ।
•रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी - यह प्लास्टिक सर्जरी भी कहलाती है । इसमें क्षत भाग को पुनः ठीक किया जाता है । इसका एक भाग कास्मेटिक सर्जरी होता है । इसका उपयोग चेहरे आदि को ठीक दिखने के लिए किया जाता है ।
•एक्सीजन - इस सर्जरी में कोई अवयव, टिशू या शरीर के कोई भाग को निकाल दिया जाता है ।
•ट्रांसप्लांट सर्जरी - इसमें शरीर कोई अवयव या भाग को किसी अन्य के शरीर से निकाल कर लगाया जाता है । इसके लिए किसी अन्य पशु से भी अवयव लिया जाता है ।
•जब किसी एक अवयव पर की जाती है तो उस अवयव के नाम से सर्जरी को संज्ञा दी जाती है । जैसे - कार्डियक सर्जरी (हृदय पर), गेस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सर्जरी (आँतों पर) आर्थोपेडिक सर्जरी (हड्डियों का पेशियों पर)
•मिनिमल इनेक्सिव सर्जरी में छोटा सा छेदन करके सूक्ष्म उपकरणों का शरीर की गुहा में प्रवेश करवा कर सर्जरी की जाती है । जैसे लैप्रोस्कोपी या एंजीयोप्लास्टी आदि ।
•खुली सर्जरी में बड़ा छेदन किया जाता है ।
•लेजर सर्जरी - इसमें टिशू को काटने के लिए लेजर का उपयोग किया जाता है, जैसे सर्जरी में स्कालपेल होते हैं, उसी तरह इस सर्जरी में लेजर किरणें होती हैं ।
•माइक्रो सर्जरी में आपरेटिंग माइक्रस्कोप का उपयोग कर सर्जन अवयवों को देखता है ।
सर्जरी के नाम से डरते क्यों है?
आपकी या आपके परिचित की सर्जरी होने से भी आप डर जाते हैं । बेहोश किये जाने की कल्पना, पता नहीं कैसे और क्या किया जायेगा? परिणाम की आशंका, आपरेशन के बाद होने वाली पीड़ा और लोगों पर आश्रित रहना आदि विषयों से लोग सर्जरी टालने की कोशिश करते हैं । इसके अतिरिक्त, पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही एक आदत सी है, ऐसी धारणा है कि अक्सर सर्जरी की नौबत किसी भी स्वास्थ्य समस्या का अन्तिम परिहार है ।
यद्यपि विस्तृत अनुसंधान के बाद अब नयी सर्जिकल तकनीक का विकास हुआ है । अब सर्जरी अन्तिम उपाय नहीं रही बल्कि अब रोग निवारणार्थ भी सर्जरी होती है । सर्जरी से अब कुछ चिरकालीन रोगों को समाप्त कर लक्षणों से अच्छा आराम मिल सकता है । वास्तव में इससे नया जीवन मिल जाता है । जैसे घुटने बदलकर आप उम्र में कई साल युवा बन सकते हैं .... आँखों का कैटरेक्ट का ऑप्रेशन करवाकर ... हृदय में स्टेंट लगाकर.... आप उम्र को 25 साल पीछे कर सकते हैं । ऐसे कई उदाहरण है ।
कई लोग सिर्फ आशंका के घेरे में घिर कर और सही सूचना के अभाव में सर्जरी को टालते है जो कि लंबे समय में महत्वपूर्ण होती है । यदि लोगों को यह मालूम हो कि सर्जरी क्यों और कैसे की जाती है, इसकी हाल ही में हुई प्रगति क्या है और आपको क्या किया जाने वाला है इसकी पूरी जानकारी और इसके परिणाम और आपका स्वास्थ्य लाभ कैसा होगा? इन सब सूचना के आधार पर आपकी जीत हो सकती है । जिन रोगियों में शिक्षित, प्रशिक्षित, सूचित करके सर्जरी के लिए तैयार किया जाता है । उनमें स्वास्थ्य लाभ शीघ्र होता देखा गया है ।
ऑप्रेशन के पहले आप इन बातों को सर्जन से पूछें -
1.पूछिये, यह ऑप्रेशन क्यों किया जा रहा है । आपका डॉक्टर आपको संक्षिप्त में समझाएगा और इसके परिणामों की जानकारी देगा । जैसा कि यदि आपका वाल्व परिवर्तन करना होतो वह बतायेगा कि या कृत्रिम वाल्व से आपके हृदय में रक्त का संचार अच्छा रहेगा, इससे हृदय का प्राकृतिक काम हो सकेगा आदि ।
2.आपको सर्जरी से क्या आशाएँ है यह समझ लें और इसकी सीमाएँ क्या हैं? अपने डॉक्टर से पूछे कि आपकी बीमारी कितनी ठीक हो सकती है और इसका प्रभाव कब तक रह सकता है ? जैसे एपेंडिक्स की सर्जरी करके उसे निकाल देने पर पुनः नहीं होता । घुटने परिवर्तन करने पर प्रोस्थेसिस की अवधि 8-10 वर्ष तक होती है । इसके बाद पुनः सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है ।
3. ऑपरेशन के आशान्वित खतरे क्या हो सकते हैं? सर्जरी की जटिलता और रोगावस्था को देखते हुए इसके उपद्रवों की कल्पना और ये उपद्रव होने पर इसकी व्यवस्था और सावधानियों की जानकारी होनी चाहिए । जैसे हिस्टेरेक्टॉमी में गर्भाशय में फायब्रायड होने पर गर्भाशय को निकाल दिया जाता है । इस ऑप्रेशन में चूंकि गर्भाशय में रक्ताधिक्य अधिक होता है उससे अधिक रक्त का रिसाव हो सकता है । ऐसी अवस्था में यदि रोगी का रक्त ग्रूप दुर्लभ, जैसे - ओ निगेटिव हो तो, एक युक्तिसंगत सावधानी है कि ऑटोलोगस ब्लड ट्रान्सफ्यूजन (रक्तदान करवाकर तैयार रखना) अथवा आपात स्थिति में जहॉं रक्त उपलब्ध होता है, उन्हें तैयार रखना।
4.सर्जरी के विकल्प क्या हो सकते हैं? यद्यपि कुछेक अवस्थाओं में सर्जरी करवाना अनिवार्य होता है फिर भी चिकित्सा विज्ञान की हाल ही की प्रगति में कई अवस्थाओं के लिए सर्जरी का विकल्प भी हो सकता है । यदि आप इन्टरनेट द्वारा आपकी अवस्था की नवीनतम उपचार की जानकारी प्राप्त कर पाते हैं तो आपकी मदद हो सकती है । जैसे लैप्रोस्कोपी इसका श्रेष्ठ उदाहरण है, जिसमें सर्जरी की अल्पतम क्षति, ऑप्रेशन के बाद शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और चमड़ी पर घाव का निशान नगण्य होता है ।
5.यदि आप सर्जरी नहीं करवाते तो क्या हो सकता है? सर्जरी करवाने के पूर्व अपने डॉक्टर से इसकी चर्चा कर लें । विशेषतः, यदि आप प्रौढ़ हैं और आपको अन्य समस्याएँ भी है जिससे सर्जरी के बाद कुछ समस्या आ सकती है या आपकी पहले भी सर्जरी हो चुकी हो या क्या आप सर्जरी को कुछ दिन स्थगित करना चाहते हों । उदाहरणार्थ - यदि आपकी उम्र 60 वर्ष की हो और आपको जोड़ों और कूल्हों में दर्द हो ऐसी स्थिति में आप सर्जरी से बचना चाहते हैं और आप अपने लक्षणों को डीएमएआरडी प्रबन्धन करें ।
6.आपको किस प्रकार का एनेस्थिया दिया जाएगा? उसकी जानकारी जरूरी है । सर्जरी के दौरान आप होश में होंगे या बेहोश में हो तो आप मानसिक रूप से तैयार रहेंगे । यदि आपके परिवार में किसी को एनेस्थेसिया से एलर्जी हो तो डॉक्टर को पहले ही बता दें, ताकि इसकी टेस्ट द्वारा जॉंच करने की व्यवस्था की जा सके ।
7.सर्जरी में खर्च कितना आयेगा? आपको यह मालूम होना चाहिए कि सर्जरी के अलावा भी अन्य खर्च होते हैं । जैसे दवा का खर्च, सर्जिकल मटेरियल का खर्च, अस्पताल का किराया, संभवित अतिरिक्त कंसल्टेशन फीस आदि । एक संभावित लगभग खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है । यदि आपका बीमा नहीं हो तो सर्जरी के अप्रत्याशित खर्च अपनी जेब से देना पड़ता है । यदि आर्थिक रूप से आप तैयार नहीं हो तो इसकी तकलीफ आपके पूरे परिवार को भुगतनी पड़ सकती है ।
8.ऑप्रेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ में कितने दिन लग सकते हैं? आपको सर्जरी के बाद कितने दिन अस्पताल में रहना पड़ सकता है जान लेना चाहिए । आप कब से चल फिर सकते हैं, आपको पूरी तरह से पुनर्स्थापित होने कितना समय लगेगा ? आपको अपनी ड्यूटी की व्यवस्था करना पड़ेगा ?
9.आपके डॉक्टर द्वारा अन्य रोगियों पर की गयी सर्जरी की सांख्यिकी क्या है? आपको यह जानकर विश्वास बढ़ेगा कि आपके डॉक्टर ने अब तक आप जैसे कितने ऑप्रेशन किये हैं ? और उनका कितने लोगों में अच्छा परिणाम निकला है ? कुछ डॉक्टर तो पूर्व रोगियों के सम्पर्क में रहते हैं । पुस्तकों से अधिक प्रैक्टिस से अनुभव होता है ।
10.आप दूसरा परामर्श कैसे ले सकते हैं? और आपके डॉक्टर का क्वालिफिकेशन क्या है ?
दूसरा परामर्श लेने का मतलब है आपको आपके डॉक्टर के प्रति संदेह है । किन्तु आप इससे संबंधित विशेषज्ञ से आपकी समस्या की अन्दरूनी जानकारी ले सकते हैं । ताकि आपको पता चल सके कि आप सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा करवा रहे हैं । डॉक्टर की क्वालिफिकेशन की जानकारी लेने से आपको संतोष होता है कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं । दूसरी सलाह लेना हो तो उससे बड़े विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए । ताकि आपको और अधिक विस्तृत जानकारी मिल सके ।
सर्जरी के नाम से डरते क्यों है?
सर्जरी के प्रकार
सर्जरी की सामान्य श्रेणियॉं हैं - आपातकालिक, उपक्रम के प्रकार, शरीर संस्थान, क्षति की मात्रा और विशेष उपकरण उपयोग ।
•इलेक्टिव सर्जरी - यह किसी अजोखिम रोग में की जाती है और रोगी की प्रार्थना पर की जाती है इसमें सर्जन की उपलब्धता और सुविधा देखी जाती है ।
•आपातकालिक सर्जरी - यह जीवन रक्षक सर्जरी है, जो शीघ्र करवानी पड़ती है ।
•एक्सप्लोरेटोरी सर्जरी - यह किसी रोग के निदान के लिए की जाती है ।
•थेरैप्टिक सर्जरी - यह पहले से निदान किये गये रोग की चिकित्सा के लिए की जाती है ।
•एम्प्यूटेशन - यह शरीर के एक भाग प्रायः हाथ, पैर या अंगुली को काटने के लिए की जाती है ।
•इप्लांटेशन - इसमें शरीर के अवयव को फिर से जोड़ा जाता है ।
•रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी - यह प्लास्टिक सर्जरी भी कहलाती है । इसमें क्षत भाग को पुनः ठीक किया जाता है । इसका एक भाग कास्मेटिक सर्जरी होता है । इसका उपयोग चेहरे आदि को ठीक दिखने के लिए किया जाता है ।
•एक्सीजन - इस सर्जरी में कोई अवयव, टिशू या शरीर के कोई भाग को निकाल दिया जाता है ।
•ट्रांसप्लांट सर्जरी - इसमें शरीर कोई अवयव या भाग को किसी अन्य के शरीर से निकाल कर लगाया जाता है । इसके लिए किसी अन्य पशु से भी अवयव लिया जाता है ।
•जब किसी एक अवयव पर की जाती है तो उस अवयव के नाम से सर्जरी को संज्ञा दी जाती है । जैसे - कार्डियक सर्जरी (हृदय पर), गेस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सर्जरी (आँतों पर) आर्थोपेडिक सर्जरी (हड्डियों का पेशियों पर)
•मिनिमल इनेक्सिव सर्जरी में छोटा सा छेदन करके सूक्ष्म उपकरणों का शरीर की गुहा में प्रवेश करवा कर सर्जरी की जाती है । जैसे लैप्रोस्कोपी या एंजीयोप्लास्टी आदि ।
•खुली सर्जरी में बड़ा छेदन किया जाता है ।
•लेजर सर्जरी - इसमें टिशू को काटने के लिए लेजर का उपयोग किया जाता है, जैसे सर्जरी में स्कालपेल होते हैं, उसी तरह इस सर्जरी में लेजर किरणें होती हैं ।
•माइक्रो सर्जरी में आपरेटिंग माइक्रस्कोप का उपयोग कर सर्जन अवयवों को देखता है ।
Monday, April 26, 2010
एड्स क्या है?
एक्वायर्ड इम्युनोडिफीसिअन्सी सिंड्रोम (एड्स) लक्षण और मानव प्रतिरक्षा मानव इम्युनोडिफीसिअन्सी वायरस (एचआईवी) के कारण प्रणाली को क्षति से होने वाले संक्रमण का एक सेट है। इस हालत में उत्तरोत्तर प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता को कम कर देता है और व्यक्तियों अवसरवादी संक्रमण और ट्यूमर की संभावना बढ़ जाती है।
यह किस कारण होता है?
यौन संचरण:
यौन संचरण दूसरे की, गुदा जननांग या मौखिक श्लेष्म झिल्ली के साथ एक व्यक्ति के यौन स्राव के बीच संपर्क के साथ होता है। ग्रहणशील असुरक्षित यौन कार्य प्रवेशात्मक असुरक्षित यौन कृत्य खतरनाक होते हैं ।
असुरक्षित गुदा संभोग के माध्यम से एचआईवी के प्रसारण के जोखिम योनि संभोग या मौखिक सेक्स से जोखिम से अधिक है। हालांकि, मौखिक सेक्स पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, एचआईवी के रूप में दोनों प्रवेशात्मक और ग्रहणशील मुख मैथुन के माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है।
यौन उत्पीड़न के बहुत संरक्षण शायद ही कार्यरत है एचआईवी संचरण के रूप में का जोखिम बढ़ जाता है और अक्सर योनि का भौतिक आघात करने से एचआईवी के संचरण की सुविधा होती है।
रक्त जनित संक्रमण:
यह संचरण मार्ग विशेष रूप से नसों द्वारा नशा करने वालों, हिमोफिलिक्स,रक्ताधान और रक्त उत्पादों के प्राप्तकर्ताओं के लिए प्रासंगिक है। सह भागीदारी और एचआईवी से संक्रमित सीरिंज का पुनः उपयोग जो रक्त -संक्रमित हो, एचआईवी के संक्रमण के लिए एक प्रमुख जोखिम का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रसवकालीन संचरण:
ईन-विट्रो बच्चे को माँ से वायरस का गर्भावस्था में संचरण के प्रसव के अंतिम सप्ताह में हो सकता है। इलाज के अभाव में, एक माँ और उसके बच्चे के बीच संचरण गर्भावस्था के दौरान, प्रसूतावस्था और प्रसव में 25% दर होती है। बहरहाल, जब माँ एंटीरेट्रोवाइरल उपचार लेती है और शल्य क्रिया द्वारा जन्म देती है, पारेषण की दर केवल 1% होती है।
जन्म के समय माँ के वायरल लोड से संक्रमण का जोखिम प्रभावित होता है; एक उच्च वायरल लोड का अर्थ एक उच्च जोखिम होता है। स्तनपान से भी संचरण का जोखिम 4% बढ़ जाता है।
लक्षण क्या हैं?
एड्स के लक्षण मुख्यतः सामान्य रूप से स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली की अवस्था विकसित नहीं होने के कारण होते हैं। ये अवस्थायें अधिकांश बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी होती है कि आम तौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली के तत्व एचआईवी संक्रमण के द्वारा नियंत्रित होते हैं,जोकि क्षत होती है। अवसरवादी संक्रमण एड्स में आम है।। एचआईवी लगभग हर अंग प्रणाली को प्रभावित करता है।
निमोसिस्टिस निमोनिया (पी सीपी) अपेक्षाकृत स्वस्थ लोगों में दुर्लभ होता है। लेकिन ईम्यूनो कॉम्पिटेंट व्यक्तियों में एचआईवी संक्रमण आम होता है। यह निमोसिस्टिस ज़िर्वेसाइ के कारण होता है।
क्षय रोग (टीबी) एचआईवी से जुड़े संक्रमण में अद्वितीय है क्योंकि यह श्वसन मार्ग के जरिए ईम्यूनो कॉम्पिटेंट लोगों को संक्रमण करती है, यह आसानी से एक बार पहचान होने पर उपचारित होती है, प्रारंभिक चरण में एचआईवी रोग हो सकते हैं, और ड्रग थेरेपी से रोकी जा सकती है हालांकि, बहु औषध प्रतिरोध एक संभावित गंभीर समस्या है।
ईसोफेजाईटिस ईसोफेगस (गले या निगलने ट्यूब जो पेट तक जाती है)के निचले अंत की परत की सूजन होती है। एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में यह सामान्य रूप से फंगस (कैंडिडिआसिस) या वायरल (हर्पिज़ सिंप्लेक्स-1 या साईयोमिगैलो वायरस संक्रमण) के कारण हो सकती है। दुर्लभ मामलों में, यह माइक्रोबैक्टीरिया की वजह से हो सकती है। एचआईवी संक्रमण में आम जीवाणु और परजीवी के संक्रमण से और कई संभावित कारणों की वजह से असामान्य अवसरवादी संक्रमण होने से अस्पष्टीकृत क्रोनिक डायरिया हो सकता है।
एचआईवी संक्रमण न्यूरोसाईकेट्रिक ऋँखला की एक किस्म की समस्या में परिणित होते हैं, तंत्रिका तंत्र के संक्रमण संभावना से या स्वयं बीमारी का प्रत्यक्ष परिणाम से भी हो सकता है।
टॉक्सोप्लाज़मोसिज़ एक एकल परजीवी रोग टॉक्सोप्लासामा गोन्डाइ के कारण होता है, यह आम तौर पर मस्तिष्क के संक्रमण की बीमारी है, जिससे टॉक्सोप्लासामा एन्सेफलाइटिस होती है, लेकिन यह आँखों में और फेफड़ों को भी संक्रमित कर सकता है और बीमारी का कारण हो सकती है।
क्रिप्टोकोकल मैनिंजाइटिस मेनिंजस का संक्रमण है (एक झिल्ली जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को कवर करती है) यह फंगस क्रिप्टोकोकस नियोफोरमैन्स द्वारा होता है। जिसके कारण बुखार, सिरदर्द, थकान, मिचली और उल्टी हो सकती है। रोगियों में झटके और भ्रम का विकास; यह एचआईवी संक्रमण के साथ अनुपचारिच छोड़ देने पर घातक हो सकता है, काफी मामलों में कई कैंसर की संख्या बढ़ गई है। यह मुख्य रूप से ऑन्कोजेनिक डीएनए वायरस के सह- संक्रमण के कारण होता है,विशेष रूप से एपिस्टिन बर्र-वायरस (ईबीवी), है कॉपॉस्की सारकॉमा से जुड़े हरपिज़ वायरस (केएसएचवी), और मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। एचआईवी संक्रमित रोगियों में कॉपॉस्की सारकॉमा (केएस) सबसे आम कैंसर में से एक है।
एड्स रोगियों को अक्सर संक्रमण के विशिष्ट लक्षण, विशेष रूप से कम ग्रेड का बुखार और वजन घटने का लक्षण विकसित होता है।
निदान कैसे किया जाता है?
बहुत से लोगों को का पता भी नहीं होता है कि उन्हें एचआईवी है। वे अफ्रीका में यौन सक्रिय शहरी आबादी का 1% से कम का परीक्षण किया गया है, और इस अनुपात से भी कम का ग्रामीण आबादी में है। इसके अलावा, गर्भवती शहरी स्वास्थ्य सुविधाओं में शामिल महिलाओं में से सिर्फ 0।5%, सलाह परीक्षण या उनके परीक्षा परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। यह अनुपात ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं में भी कम है। इसलिए, रक्त दाता और रक्त में चिकित्सा और चिकित्सा अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया उत्पादों एचआईवी की जांच की जाती हैं।
एचआईवी परीक्षण आमतौर शिरा रक्त द्वारा किया जाता हैं। कई प्रयोगशालाओं चौथी पीढ़ी के स्क्रीनिंग टेस्ट जो विरोधी एचआईवी एंटीबॉडी (आईजीजी और आईजीएम) का पता लगाने और एचआईवी पी24 प्रतिजन का उपयोग करते हैं। एक रोगी में पहले से नकारात्मक एचआईवी एंटीबॉडी या प्रतिजन का होने कापता लगाना के एचआईवी संक्रमण का सबूत है। जिन व्यक्तियों का पहला नमूना एचआईवी संक्रमण के प्रमाण इंगित करता है एक पल के रक्त के नमूने पर दोहराने का परीक्षण की पुष्टि कर सकता है। विन्डो की अवधि (आरंभिक संक्रमण और संक्रमण के खिलाफ पाई गई एंटीबॉडी के विकास के बीच का समय) 3-6 महीने के बाद परीक्षण सकारात्मक कर सकते हैं।
वायरस संक्रमण की विन्डो की अवधि के दौरान पॉलिमेरज़ श्रृंखला प्रतिक्रिया (पीसीआर) का उपयोग कर और एक संक्रमण का पता चल सकता है, अक्सर चौथी पीढ़ी की ईआईए स्क्रीनिंग परीक्षण का उपयोग कर पहले पता से चला सकते हैं सकारात्मक पीसीआर से प्राप्त परिणामों को एंटीबॉडी परीक्षण से पुष्टि की जा सकती है। नियमित रूप से नवजात शिशुओं में संक्रमण के लिए एचआईवी परीक्षण किया जाता है, एचआईवी को जन्म पॉजिटिव जो माताओं को एचआईवी पॉजिटिव होता है, बच्चे के रक्त में है मातृ एंटीबॉडी की उपस्थिति का कोई एचआईवी के लिए मूल्य नहीं होता है। एचआईवी संक्रमण केवल पीसीआर, एचआईवी बच्चों लिम्फोसाइटों में समर्थक वायरल के लिए डीएनए परीक्षण से पता चला जा सकता है।
यह कैसे व्यवहार किया जाता है?
एचआईवी संक्रमण के लिए वर्तमान उपचार अत्यधिक सक्रिय एंटीरेट्रोवाइरल थैरेपी या एचएएआरटी होती हैं। वर्तमान श्रेष्ठ एंटीरेट्रोवाइरल एजेंट तीन में से कम से कम दो प्रकार की संबंधित दवाओं से मिलकर, एचएएआरटी विकल्पों ('या' कॉकटेल') के संयोजन से मिलकर बनता है एचएएआरटी रोगी के लक्षण और वायरिमिया का स्थिरीकरण करता है, लेकिन यह न तो एचआईवी का इलाज है, और न ही उन्नत लक्षण, और एचआईवी-1 के उच्च स्तरों में, अक्सर एचएएआरटी प्रतिरोधी, वापस एक बार सामान्य होने पर इलाज बंद नहीं करना चाहिये।
एचआईवी संक्रमण में एक व्यक्ति को जीवन भर के लिए एचएएआरटी लेने का प्रयोग करना पडता है इस के बावजूद, कई एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति अपने सामान्य स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता, जो एचआईवी से जुड़ी रुग्णता और हुई मृत्यु में उल्लेखनीय सुधार महसूस किया है।
एक्वायर्ड इम्युनोडिफीसिअन्सी सिंड्रोम (एड्स) लक्षण और मानव प्रतिरक्षा मानव इम्युनोडिफीसिअन्सी वायरस (एचआईवी) के कारण प्रणाली को क्षति से होने वाले संक्रमण का एक सेट है। इस हालत में उत्तरोत्तर प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता को कम कर देता है और व्यक्तियों अवसरवादी संक्रमण और ट्यूमर की संभावना बढ़ जाती है।
यह किस कारण होता है?
यौन संचरण:
यौन संचरण दूसरे की, गुदा जननांग या मौखिक श्लेष्म झिल्ली के साथ एक व्यक्ति के यौन स्राव के बीच संपर्क के साथ होता है। ग्रहणशील असुरक्षित यौन कार्य प्रवेशात्मक असुरक्षित यौन कृत्य खतरनाक होते हैं ।
असुरक्षित गुदा संभोग के माध्यम से एचआईवी के प्रसारण के जोखिम योनि संभोग या मौखिक सेक्स से जोखिम से अधिक है। हालांकि, मौखिक सेक्स पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, एचआईवी के रूप में दोनों प्रवेशात्मक और ग्रहणशील मुख मैथुन के माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है।
यौन उत्पीड़न के बहुत संरक्षण शायद ही कार्यरत है एचआईवी संचरण के रूप में का जोखिम बढ़ जाता है और अक्सर योनि का भौतिक आघात करने से एचआईवी के संचरण की सुविधा होती है।
रक्त जनित संक्रमण:
यह संचरण मार्ग विशेष रूप से नसों द्वारा नशा करने वालों, हिमोफिलिक्स,रक्ताधान और रक्त उत्पादों के प्राप्तकर्ताओं के लिए प्रासंगिक है। सह भागीदारी और एचआईवी से संक्रमित सीरिंज का पुनः उपयोग जो रक्त -संक्रमित हो, एचआईवी के संक्रमण के लिए एक प्रमुख जोखिम का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रसवकालीन संचरण:
ईन-विट्रो बच्चे को माँ से वायरस का गर्भावस्था में संचरण के प्रसव के अंतिम सप्ताह में हो सकता है। इलाज के अभाव में, एक माँ और उसके बच्चे के बीच संचरण गर्भावस्था के दौरान, प्रसूतावस्था और प्रसव में 25% दर होती है। बहरहाल, जब माँ एंटीरेट्रोवाइरल उपचार लेती है और शल्य क्रिया द्वारा जन्म देती है, पारेषण की दर केवल 1% होती है।
जन्म के समय माँ के वायरल लोड से संक्रमण का जोखिम प्रभावित होता है; एक उच्च वायरल लोड का अर्थ एक उच्च जोखिम होता है। स्तनपान से भी संचरण का जोखिम 4% बढ़ जाता है।
लक्षण क्या हैं?
एड्स के लक्षण मुख्यतः सामान्य रूप से स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली की अवस्था विकसित नहीं होने के कारण होते हैं। ये अवस्थायें अधिकांश बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी होती है कि आम तौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली के तत्व एचआईवी संक्रमण के द्वारा नियंत्रित होते हैं,जोकि क्षत होती है। अवसरवादी संक्रमण एड्स में आम है।। एचआईवी लगभग हर अंग प्रणाली को प्रभावित करता है।
निमोसिस्टिस निमोनिया (पी सीपी) अपेक्षाकृत स्वस्थ लोगों में दुर्लभ होता है। लेकिन ईम्यूनो कॉम्पिटेंट व्यक्तियों में एचआईवी संक्रमण आम होता है। यह निमोसिस्टिस ज़िर्वेसाइ के कारण होता है।
क्षय रोग (टीबी) एचआईवी से जुड़े संक्रमण में अद्वितीय है क्योंकि यह श्वसन मार्ग के जरिए ईम्यूनो कॉम्पिटेंट लोगों को संक्रमण करती है, यह आसानी से एक बार पहचान होने पर उपचारित होती है, प्रारंभिक चरण में एचआईवी रोग हो सकते हैं, और ड्रग थेरेपी से रोकी जा सकती है हालांकि, बहु औषध प्रतिरोध एक संभावित गंभीर समस्या है।
ईसोफेजाईटिस ईसोफेगस (गले या निगलने ट्यूब जो पेट तक जाती है)के निचले अंत की परत की सूजन होती है। एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में यह सामान्य रूप से फंगस (कैंडिडिआसिस) या वायरल (हर्पिज़ सिंप्लेक्स-1 या साईयोमिगैलो वायरस संक्रमण) के कारण हो सकती है। दुर्लभ मामलों में, यह माइक्रोबैक्टीरिया की वजह से हो सकती है। एचआईवी संक्रमण में आम जीवाणु और परजीवी के संक्रमण से और कई संभावित कारणों की वजह से असामान्य अवसरवादी संक्रमण होने से अस्पष्टीकृत क्रोनिक डायरिया हो सकता है।
एचआईवी संक्रमण न्यूरोसाईकेट्रिक ऋँखला की एक किस्म की समस्या में परिणित होते हैं, तंत्रिका तंत्र के संक्रमण संभावना से या स्वयं बीमारी का प्रत्यक्ष परिणाम से भी हो सकता है।
टॉक्सोप्लाज़मोसिज़ एक एकल परजीवी रोग टॉक्सोप्लासामा गोन्डाइ के कारण होता है, यह आम तौर पर मस्तिष्क के संक्रमण की बीमारी है, जिससे टॉक्सोप्लासामा एन्सेफलाइटिस होती है, लेकिन यह आँखों में और फेफड़ों को भी संक्रमित कर सकता है और बीमारी का कारण हो सकती है।
क्रिप्टोकोकल मैनिंजाइटिस मेनिंजस का संक्रमण है (एक झिल्ली जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को कवर करती है) यह फंगस क्रिप्टोकोकस नियोफोरमैन्स द्वारा होता है। जिसके कारण बुखार, सिरदर्द, थकान, मिचली और उल्टी हो सकती है। रोगियों में झटके और भ्रम का विकास; यह एचआईवी संक्रमण के साथ अनुपचारिच छोड़ देने पर घातक हो सकता है, काफी मामलों में कई कैंसर की संख्या बढ़ गई है। यह मुख्य रूप से ऑन्कोजेनिक डीएनए वायरस के सह- संक्रमण के कारण होता है,विशेष रूप से एपिस्टिन बर्र-वायरस (ईबीवी), है कॉपॉस्की सारकॉमा से जुड़े हरपिज़ वायरस (केएसएचवी), और मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। एचआईवी संक्रमित रोगियों में कॉपॉस्की सारकॉमा (केएस) सबसे आम कैंसर में से एक है।
एड्स रोगियों को अक्सर संक्रमण के विशिष्ट लक्षण, विशेष रूप से कम ग्रेड का बुखार और वजन घटने का लक्षण विकसित होता है।
निदान कैसे किया जाता है?
बहुत से लोगों को का पता भी नहीं होता है कि उन्हें एचआईवी है। वे अफ्रीका में यौन सक्रिय शहरी आबादी का 1% से कम का परीक्षण किया गया है, और इस अनुपात से भी कम का ग्रामीण आबादी में है। इसके अलावा, गर्भवती शहरी स्वास्थ्य सुविधाओं में शामिल महिलाओं में से सिर्फ 0।5%, सलाह परीक्षण या उनके परीक्षा परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। यह अनुपात ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं में भी कम है। इसलिए, रक्त दाता और रक्त में चिकित्सा और चिकित्सा अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया उत्पादों एचआईवी की जांच की जाती हैं।
एचआईवी परीक्षण आमतौर शिरा रक्त द्वारा किया जाता हैं। कई प्रयोगशालाओं चौथी पीढ़ी के स्क्रीनिंग टेस्ट जो विरोधी एचआईवी एंटीबॉडी (आईजीजी और आईजीएम) का पता लगाने और एचआईवी पी24 प्रतिजन का उपयोग करते हैं। एक रोगी में पहले से नकारात्मक एचआईवी एंटीबॉडी या प्रतिजन का होने कापता लगाना के एचआईवी संक्रमण का सबूत है। जिन व्यक्तियों का पहला नमूना एचआईवी संक्रमण के प्रमाण इंगित करता है एक पल के रक्त के नमूने पर दोहराने का परीक्षण की पुष्टि कर सकता है। विन्डो की अवधि (आरंभिक संक्रमण और संक्रमण के खिलाफ पाई गई एंटीबॉडी के विकास के बीच का समय) 3-6 महीने के बाद परीक्षण सकारात्मक कर सकते हैं।
वायरस संक्रमण की विन्डो की अवधि के दौरान पॉलिमेरज़ श्रृंखला प्रतिक्रिया (पीसीआर) का उपयोग कर और एक संक्रमण का पता चल सकता है, अक्सर चौथी पीढ़ी की ईआईए स्क्रीनिंग परीक्षण का उपयोग कर पहले पता से चला सकते हैं सकारात्मक पीसीआर से प्राप्त परिणामों को एंटीबॉडी परीक्षण से पुष्टि की जा सकती है। नियमित रूप से नवजात शिशुओं में संक्रमण के लिए एचआईवी परीक्षण किया जाता है, एचआईवी को जन्म पॉजिटिव जो माताओं को एचआईवी पॉजिटिव होता है, बच्चे के रक्त में है मातृ एंटीबॉडी की उपस्थिति का कोई एचआईवी के लिए मूल्य नहीं होता है। एचआईवी संक्रमण केवल पीसीआर, एचआईवी बच्चों लिम्फोसाइटों में समर्थक वायरल के लिए डीएनए परीक्षण से पता चला जा सकता है।
यह कैसे व्यवहार किया जाता है?
एचआईवी संक्रमण के लिए वर्तमान उपचार अत्यधिक सक्रिय एंटीरेट्रोवाइरल थैरेपी या एचएएआरटी होती हैं। वर्तमान श्रेष्ठ एंटीरेट्रोवाइरल एजेंट तीन में से कम से कम दो प्रकार की संबंधित दवाओं से मिलकर, एचएएआरटी विकल्पों ('या' कॉकटेल') के संयोजन से मिलकर बनता है एचएएआरटी रोगी के लक्षण और वायरिमिया का स्थिरीकरण करता है, लेकिन यह न तो एचआईवी का इलाज है, और न ही उन्नत लक्षण, और एचआईवी-1 के उच्च स्तरों में, अक्सर एचएएआरटी प्रतिरोधी, वापस एक बार सामान्य होने पर इलाज बंद नहीं करना चाहिये।
एचआईवी संक्रमण में एक व्यक्ति को जीवन भर के लिए एचएएआरटी लेने का प्रयोग करना पडता है इस के बावजूद, कई एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति अपने सामान्य स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता, जो एचआईवी से जुड़ी रुग्णता और हुई मृत्यु में उल्लेखनीय सुधार महसूस किया है।
एड्स क्या है?
एक्वायर्ड इम्युनोडिफीसिअन्सी सिंड्रोम (एड्स) लक्षण और मानव प्रतिरक्षा मानव इम्युनोडिफीसिअन्सी वायरस (एचआईवी) के कारण प्रणाली को क्षति से होने वाले संक्रमण का एक सेट है। इस हालत में उत्तरोत्तर प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता को कम कर देता है और व्यक्तियों अवसरवादी संक्रमण और ट्यूमर की संभावना बढ़ जाती है।
यह किस कारण होता है?
यौन संचरण:
यौन संचरण दूसरे की, गुदा जननांग या मौखिक श्लेष्म झिल्ली के साथ एक व्यक्ति के यौन स्राव के बीच संपर्क के साथ होता है। ग्रहणशील असुरक्षित यौन कार्य प्रवेशात्मक असुरक्षित यौन कृत्य खतरनाक होते हैं ।
असुरक्षित गुदा संभोग के माध्यम से एचआईवी के प्रसारण के जोखिम योनि संभोग या मौखिक सेक्स से जोखिम से अधिक है। हालांकि, मौखिक सेक्स पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, एचआईवी के रूप में दोनों प्रवेशात्मक और ग्रहणशील मुख मैथुन के माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है।
यौन उत्पीड़न के बहुत संरक्षण शायद ही कार्यरत है एचआईवी संचरण के रूप में का जोखिम बढ़ जाता है और अक्सर योनि का भौतिक आघात करने से एचआईवी के संचरण की सुविधा होती है।
रक्त जनित संक्रमण:
यह संचरण मार्ग विशेष रूप से नसों द्वारा नशा करने वालों, हिमोफिलिक्स,रक्ताधान और रक्त उत्पादों के प्राप्तकर्ताओं के लिए प्रासंगिक है। सह भागीदारी और एचआईवी से संक्रमित सीरिंज का पुनः उपयोग जो रक्त -संक्रमित हो, एचआईवी के संक्रमण के लिए एक प्रमुख जोखिम का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रसवकालीन संचरण:
ईन-विट्रो बच्चे को माँ से वायरस का गर्भावस्था में संचरण के प्रसव के अंतिम सप्ताह में हो सकता है। इलाज के अभाव में, एक माँ और उसके बच्चे के बीच संचरण गर्भावस्था के दौरान, प्रसूतावस्था और प्रसव में 25% दर होती है। बहरहाल, जब माँ एंटीरेट्रोवाइरल उपचार लेती है और शल्य क्रिया द्वारा जन्म देती है, पारेषण की दर केवल 1% होती है।
जन्म के समय माँ के वायरल लोड से संक्रमण का जोखिम प्रभावित होता है; एक उच्च वायरल लोड का अर्थ एक उच्च जोखिम होता है। स्तनपान से भी संचरण का जोखिम 4% बढ़ जाता है।
लक्षण क्या हैं?
एड्स के लक्षण मुख्यतः सामान्य रूप से स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली की अवस्था विकसित नहीं होने के कारण होते हैं। ये अवस्थायें अधिकांश बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी होती है कि आम तौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली के तत्व एचआईवी संक्रमण के द्वारा नियंत्रित होते हैं,जोकि क्षत होती है। अवसरवादी संक्रमण एड्स में आम है।। एचआईवी लगभग हर अंग प्रणाली को प्रभावित करता है।
निमोसिस्टिस निमोनिया (पी सीपी) अपेक्षाकृत स्वस्थ लोगों में दुर्लभ होता है। लेकिन ईम्यूनो कॉम्पिटेंट व्यक्तियों में एचआईवी संक्रमण आम होता है। यह निमोसिस्टिस ज़िर्वेसाइ के कारण होता है।
क्षय रोग (टीबी) एचआईवी से जुड़े संक्रमण में अद्वितीय है क्योंकि यह श्वसन मार्ग के जरिए ईम्यूनो कॉम्पिटेंट लोगों को संक्रमण करती है, यह आसानी से एक बार पहचान होने पर उपचारित होती है, प्रारंभिक चरण में एचआईवी रोग हो सकते हैं, और ड्रग थेरेपी से रोकी जा सकती है हालांकि, बहु औषध प्रतिरोध एक संभावित गंभीर समस्या है।
ईसोफेजाईटिस ईसोफेगस (गले या निगलने ट्यूब जो पेट तक जाती है)के निचले अंत की परत की सूजन होती है। एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में यह सामान्य रूप से फंगस (कैंडिडिआसिस) या वायरल (हर्पिज़ सिंप्लेक्स-1 या साईयोमिगैलो वायरस संक्रमण) के कारण हो सकती है। दुर्लभ मामलों में, यह माइक्रोबैक्टीरिया की वजह से हो सकती है। एचआईवी संक्रमण में आम जीवाणु और परजीवी के संक्रमण से और कई संभावित कारणों की वजह से असामान्य अवसरवादी संक्रमण होने से अस्पष्टीकृत क्रोनिक डायरिया हो सकता है।
एचआईवी संक्रमण न्यूरोसाईकेट्रिक ऋँखला की एक किस्म की समस्या में परिणित होते हैं, तंत्रिका तंत्र के संक्रमण संभावना से या स्वयं बीमारी का प्रत्यक्ष परिणाम से भी हो सकता है।
टॉक्सोप्लाज़मोसिज़ एक एकल परजीवी रोग टॉक्सोप्लासामा गोन्डाइ के कारण होता है, यह आम तौर पर मस्तिष्क के संक्रमण की बीमारी है, जिससे टॉक्सोप्लासामा एन्सेफलाइटिस होती है, लेकिन यह आँखों में और फेफड़ों को भी संक्रमित कर सकता है और बीमारी का कारण हो सकती है।
क्रिप्टोकोकल मैनिंजाइटिस मेनिंजस का संक्रमण है (एक झिल्ली जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को कवर करती है) यह फंगस क्रिप्टोकोकस नियोफोरमैन्स द्वारा होता है। जिसके कारण बुखार, सिरदर्द, थकान, मिचली और उल्टी हो सकती है। रोगियों में झटके और भ्रम का विकास; यह एचआईवी संक्रमण के साथ अनुपचारिच छोड़ देने पर घातक हो सकता है, काफी मामलों में कई कैंसर की संख्या बढ़ गई है। यह मुख्य रूप से ऑन्कोजेनिक डीएनए वायरस के सह- संक्रमण के कारण होता है,विशेष रूप से एपिस्टिन बर्र-वायरस (ईबीवी), है कॉपॉस्की सारकॉमा से जुड़े हरपिज़ वायरस (केएसएचवी), और मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। एचआईवी संक्रमित रोगियों में कॉपॉस्की सारकॉमा (केएस) सबसे आम कैंसर में से एक है।
एड्स रोगियों को अक्सर संक्रमण के विशिष्ट लक्षण, विशेष रूप से कम ग्रेड का बुखार और वजन घटने का लक्षण विकसित होता है।
निदान कैसे किया जाता है?
बहुत से लोगों को का पता भी नहीं होता है कि उन्हें एचआईवी है। वे अफ्रीका में यौन सक्रिय शहरी आबादी का 1% से कम का परीक्षण किया गया है, और इस अनुपात से भी कम का ग्रामीण आबादी में है। इसके अलावा, गर्भवती शहरी स्वास्थ्य सुविधाओं में शामिल महिलाओं में से सिर्फ 0।5%, सलाह परीक्षण या उनके परीक्षा परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। यह अनुपात ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं में भी कम है। इसलिए, रक्त दाता और रक्त में चिकित्सा और चिकित्सा अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया उत्पादों एचआईवी की जांच की जाती हैं।
एचआईवी परीक्षण आमतौर शिरा रक्त द्वारा किया जाता हैं। कई प्रयोगशालाओं चौथी पीढ़ी के स्क्रीनिंग टेस्ट जो विरोधी एचआईवी एंटीबॉडी (आईजीजी और आईजीएम) का पता लगाने और एचआईवी पी24 प्रतिजन का उपयोग करते हैं। एक रोगी में पहले से नकारात्मक एचआईवी एंटीबॉडी या प्रतिजन का होने कापता लगाना के एचआईवी संक्रमण का सबूत है। जिन व्यक्तियों का पहला नमूना एचआईवी संक्रमण के प्रमाण इंगित करता है एक पल के रक्त के नमूने पर दोहराने का परीक्षण की पुष्टि कर सकता है। विन्डो की अवधि (आरंभिक संक्रमण और संक्रमण के खिलाफ पाई गई एंटीबॉडी के विकास के बीच का समय) 3-6 महीने के बाद परीक्षण सकारात्मक कर सकते हैं।
वायरस संक्रमण की विन्डो की अवधि के दौरान पॉलिमेरज़ श्रृंखला प्रतिक्रिया (पीसीआर) का उपयोग कर और एक संक्रमण का पता चल सकता है, अक्सर चौथी पीढ़ी की ईआईए स्क्रीनिंग परीक्षण का उपयोग कर पहले पता से चला सकते हैं सकारात्मक पीसीआर से प्राप्त परिणामों को एंटीबॉडी परीक्षण से पुष्टि की जा सकती है। नियमित रूप से नवजात शिशुओं में संक्रमण के लिए एचआईवी परीक्षण किया जाता है, एचआईवी को जन्म पॉजिटिव जो माताओं को एचआईवी पॉजिटिव होता है, बच्चे के रक्त में है मातृ एंटीबॉडी की उपस्थिति का कोई एचआईवी के लिए मूल्य नहीं होता है। एचआईवी संक्रमण केवल पीसीआर, एचआईवी बच्चों लिम्फोसाइटों में समर्थक वायरल के लिए डीएनए परीक्षण से पता चला जा सकता है।
यह कैसे व्यवहार किया जाता है?
एचआईवी संक्रमण के लिए वर्तमान उपचार अत्यधिक सक्रिय एंटीरेट्रोवाइरल थैरेपी या एचएएआरटी होती हैं। वर्तमान श्रेष्ठ एंटीरेट्रोवाइरल एजेंट तीन में से कम से कम दो प्रकार की संबंधित दवाओं से मिलकर, एचएएआरटी विकल्पों ('या' कॉकटेल') के संयोजन से मिलकर बनता है एचएएआरटी रोगी के लक्षण और वायरिमिया का स्थिरीकरण करता है, लेकिन यह न तो एचआईवी का इलाज है, और न ही उन्नत लक्षण, और एचआईवी-1 के उच्च स्तरों में, अक्सर एचएएआरटी प्रतिरोधी, वापस एक बार सामान्य होने पर इलाज बंद नहीं करना चाहिये।
एचआईवी संक्रमण में एक व्यक्ति को जीवन भर के लिए एचएएआरटी लेने का प्रयोग करना पडता है इस के बावजूद, कई एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति अपने सामान्य स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता, जो एचआईवी से जुड़ी रुग्णता और हुई मृत्यु में उल्लेखनीय सुधार महसूस किया है।
एक्वायर्ड इम्युनोडिफीसिअन्सी सिंड्रोम (एड्स) लक्षण और मानव प्रतिरक्षा मानव इम्युनोडिफीसिअन्सी वायरस (एचआईवी) के कारण प्रणाली को क्षति से होने वाले संक्रमण का एक सेट है। इस हालत में उत्तरोत्तर प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता को कम कर देता है और व्यक्तियों अवसरवादी संक्रमण और ट्यूमर की संभावना बढ़ जाती है।
यह किस कारण होता है?
यौन संचरण:
यौन संचरण दूसरे की, गुदा जननांग या मौखिक श्लेष्म झिल्ली के साथ एक व्यक्ति के यौन स्राव के बीच संपर्क के साथ होता है। ग्रहणशील असुरक्षित यौन कार्य प्रवेशात्मक असुरक्षित यौन कृत्य खतरनाक होते हैं ।
असुरक्षित गुदा संभोग के माध्यम से एचआईवी के प्रसारण के जोखिम योनि संभोग या मौखिक सेक्स से जोखिम से अधिक है। हालांकि, मौखिक सेक्स पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, एचआईवी के रूप में दोनों प्रवेशात्मक और ग्रहणशील मुख मैथुन के माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है।
यौन उत्पीड़न के बहुत संरक्षण शायद ही कार्यरत है एचआईवी संचरण के रूप में का जोखिम बढ़ जाता है और अक्सर योनि का भौतिक आघात करने से एचआईवी के संचरण की सुविधा होती है।
रक्त जनित संक्रमण:
यह संचरण मार्ग विशेष रूप से नसों द्वारा नशा करने वालों, हिमोफिलिक्स,रक्ताधान और रक्त उत्पादों के प्राप्तकर्ताओं के लिए प्रासंगिक है। सह भागीदारी और एचआईवी से संक्रमित सीरिंज का पुनः उपयोग जो रक्त -संक्रमित हो, एचआईवी के संक्रमण के लिए एक प्रमुख जोखिम का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रसवकालीन संचरण:
ईन-विट्रो बच्चे को माँ से वायरस का गर्भावस्था में संचरण के प्रसव के अंतिम सप्ताह में हो सकता है। इलाज के अभाव में, एक माँ और उसके बच्चे के बीच संचरण गर्भावस्था के दौरान, प्रसूतावस्था और प्रसव में 25% दर होती है। बहरहाल, जब माँ एंटीरेट्रोवाइरल उपचार लेती है और शल्य क्रिया द्वारा जन्म देती है, पारेषण की दर केवल 1% होती है।
जन्म के समय माँ के वायरल लोड से संक्रमण का जोखिम प्रभावित होता है; एक उच्च वायरल लोड का अर्थ एक उच्च जोखिम होता है। स्तनपान से भी संचरण का जोखिम 4% बढ़ जाता है।
लक्षण क्या हैं?
एड्स के लक्षण मुख्यतः सामान्य रूप से स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली की अवस्था विकसित नहीं होने के कारण होते हैं। ये अवस्थायें अधिकांश बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी होती है कि आम तौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली के तत्व एचआईवी संक्रमण के द्वारा नियंत्रित होते हैं,जोकि क्षत होती है। अवसरवादी संक्रमण एड्स में आम है।। एचआईवी लगभग हर अंग प्रणाली को प्रभावित करता है।
निमोसिस्टिस निमोनिया (पी सीपी) अपेक्षाकृत स्वस्थ लोगों में दुर्लभ होता है। लेकिन ईम्यूनो कॉम्पिटेंट व्यक्तियों में एचआईवी संक्रमण आम होता है। यह निमोसिस्टिस ज़िर्वेसाइ के कारण होता है।
क्षय रोग (टीबी) एचआईवी से जुड़े संक्रमण में अद्वितीय है क्योंकि यह श्वसन मार्ग के जरिए ईम्यूनो कॉम्पिटेंट लोगों को संक्रमण करती है, यह आसानी से एक बार पहचान होने पर उपचारित होती है, प्रारंभिक चरण में एचआईवी रोग हो सकते हैं, और ड्रग थेरेपी से रोकी जा सकती है हालांकि, बहु औषध प्रतिरोध एक संभावित गंभीर समस्या है।
ईसोफेजाईटिस ईसोफेगस (गले या निगलने ट्यूब जो पेट तक जाती है)के निचले अंत की परत की सूजन होती है। एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में यह सामान्य रूप से फंगस (कैंडिडिआसिस) या वायरल (हर्पिज़ सिंप्लेक्स-1 या साईयोमिगैलो वायरस संक्रमण) के कारण हो सकती है। दुर्लभ मामलों में, यह माइक्रोबैक्टीरिया की वजह से हो सकती है। एचआईवी संक्रमण में आम जीवाणु और परजीवी के संक्रमण से और कई संभावित कारणों की वजह से असामान्य अवसरवादी संक्रमण होने से अस्पष्टीकृत क्रोनिक डायरिया हो सकता है।
एचआईवी संक्रमण न्यूरोसाईकेट्रिक ऋँखला की एक किस्म की समस्या में परिणित होते हैं, तंत्रिका तंत्र के संक्रमण संभावना से या स्वयं बीमारी का प्रत्यक्ष परिणाम से भी हो सकता है।
टॉक्सोप्लाज़मोसिज़ एक एकल परजीवी रोग टॉक्सोप्लासामा गोन्डाइ के कारण होता है, यह आम तौर पर मस्तिष्क के संक्रमण की बीमारी है, जिससे टॉक्सोप्लासामा एन्सेफलाइटिस होती है, लेकिन यह आँखों में और फेफड़ों को भी संक्रमित कर सकता है और बीमारी का कारण हो सकती है।
क्रिप्टोकोकल मैनिंजाइटिस मेनिंजस का संक्रमण है (एक झिल्ली जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को कवर करती है) यह फंगस क्रिप्टोकोकस नियोफोरमैन्स द्वारा होता है। जिसके कारण बुखार, सिरदर्द, थकान, मिचली और उल्टी हो सकती है। रोगियों में झटके और भ्रम का विकास; यह एचआईवी संक्रमण के साथ अनुपचारिच छोड़ देने पर घातक हो सकता है, काफी मामलों में कई कैंसर की संख्या बढ़ गई है। यह मुख्य रूप से ऑन्कोजेनिक डीएनए वायरस के सह- संक्रमण के कारण होता है,विशेष रूप से एपिस्टिन बर्र-वायरस (ईबीवी), है कॉपॉस्की सारकॉमा से जुड़े हरपिज़ वायरस (केएसएचवी), और मानव पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। एचआईवी संक्रमित रोगियों में कॉपॉस्की सारकॉमा (केएस) सबसे आम कैंसर में से एक है।
एड्स रोगियों को अक्सर संक्रमण के विशिष्ट लक्षण, विशेष रूप से कम ग्रेड का बुखार और वजन घटने का लक्षण विकसित होता है।
निदान कैसे किया जाता है?
बहुत से लोगों को का पता भी नहीं होता है कि उन्हें एचआईवी है। वे अफ्रीका में यौन सक्रिय शहरी आबादी का 1% से कम का परीक्षण किया गया है, और इस अनुपात से भी कम का ग्रामीण आबादी में है। इसके अलावा, गर्भवती शहरी स्वास्थ्य सुविधाओं में शामिल महिलाओं में से सिर्फ 0।5%, सलाह परीक्षण या उनके परीक्षा परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। यह अनुपात ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं में भी कम है। इसलिए, रक्त दाता और रक्त में चिकित्सा और चिकित्सा अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया उत्पादों एचआईवी की जांच की जाती हैं।
एचआईवी परीक्षण आमतौर शिरा रक्त द्वारा किया जाता हैं। कई प्रयोगशालाओं चौथी पीढ़ी के स्क्रीनिंग टेस्ट जो विरोधी एचआईवी एंटीबॉडी (आईजीजी और आईजीएम) का पता लगाने और एचआईवी पी24 प्रतिजन का उपयोग करते हैं। एक रोगी में पहले से नकारात्मक एचआईवी एंटीबॉडी या प्रतिजन का होने कापता लगाना के एचआईवी संक्रमण का सबूत है। जिन व्यक्तियों का पहला नमूना एचआईवी संक्रमण के प्रमाण इंगित करता है एक पल के रक्त के नमूने पर दोहराने का परीक्षण की पुष्टि कर सकता है। विन्डो की अवधि (आरंभिक संक्रमण और संक्रमण के खिलाफ पाई गई एंटीबॉडी के विकास के बीच का समय) 3-6 महीने के बाद परीक्षण सकारात्मक कर सकते हैं।
वायरस संक्रमण की विन्डो की अवधि के दौरान पॉलिमेरज़ श्रृंखला प्रतिक्रिया (पीसीआर) का उपयोग कर और एक संक्रमण का पता चल सकता है, अक्सर चौथी पीढ़ी की ईआईए स्क्रीनिंग परीक्षण का उपयोग कर पहले पता से चला सकते हैं सकारात्मक पीसीआर से प्राप्त परिणामों को एंटीबॉडी परीक्षण से पुष्टि की जा सकती है। नियमित रूप से नवजात शिशुओं में संक्रमण के लिए एचआईवी परीक्षण किया जाता है, एचआईवी को जन्म पॉजिटिव जो माताओं को एचआईवी पॉजिटिव होता है, बच्चे के रक्त में है मातृ एंटीबॉडी की उपस्थिति का कोई एचआईवी के लिए मूल्य नहीं होता है। एचआईवी संक्रमण केवल पीसीआर, एचआईवी बच्चों लिम्फोसाइटों में समर्थक वायरल के लिए डीएनए परीक्षण से पता चला जा सकता है।
यह कैसे व्यवहार किया जाता है?
एचआईवी संक्रमण के लिए वर्तमान उपचार अत्यधिक सक्रिय एंटीरेट्रोवाइरल थैरेपी या एचएएआरटी होती हैं। वर्तमान श्रेष्ठ एंटीरेट्रोवाइरल एजेंट तीन में से कम से कम दो प्रकार की संबंधित दवाओं से मिलकर, एचएएआरटी विकल्पों ('या' कॉकटेल') के संयोजन से मिलकर बनता है एचएएआरटी रोगी के लक्षण और वायरिमिया का स्थिरीकरण करता है, लेकिन यह न तो एचआईवी का इलाज है, और न ही उन्नत लक्षण, और एचआईवी-1 के उच्च स्तरों में, अक्सर एचएएआरटी प्रतिरोधी, वापस एक बार सामान्य होने पर इलाज बंद नहीं करना चाहिये।
एचआईवी संक्रमण में एक व्यक्ति को जीवन भर के लिए एचएएआरटी लेने का प्रयोग करना पडता है इस के बावजूद, कई एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति अपने सामान्य स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता, जो एचआईवी से जुड़ी रुग्णता और हुई मृत्यु में उल्लेखनीय सुधार महसूस किया है।
एलर्जी क्या है
एलर्जी क्या है?
शरीर एक सुरक्षा व्यवस्था प्रतिरक्षा प्रणाली को ईम्यून सिस्टम कहा जाता है, जो आम तौर पर पर्यावरण से संभावित खतरनाक एंटीजन की प्रविष्टि या शरीर में वृद्धि को सीमित करने की कोशिश में जोखिम प्रतिक्रिया और जीवाणुओं, वायरस आदि संक्रमण को रोकने का कार्य करता है। इस के लिए सुरक्षा कोशिकाओं और रसायनों को छोडता है जो एंटीजन को नष्ट कर सकते हैं।
हालांकि, कई बार इस प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज के साथ एक समस्या है और जो वास्तव में बहुत से एंटीजन की उपस्थिति के लिए अत्यंत अनुभुत की जाती है,खतरनाक है, इसके अलावा शरीर में एक चुभन होती है। परिणामस्वरूप में यदि शरीर में एक सामान्य प्रतिजन भी उत्पन्न होते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली अतिक्रियाशील हो जाती है और नाटकीय ढंग से इन एंटीजन की प्रतिक्रिया पैदा करता है जैसे एक गंभीर जो भी इस तरह शरीर के संपर्क में आने एंटीजन को ट्रिगर करने को नष्ट करने की कोशिश में हो।
इस अप्रत्याशित प्रतिक्रिया को एलर्जी कहा जाता है, और इसकी तीव्रग्राहिता गंभीरता मध्यम प्रतिक्रिया से सूजन तक एक भिन्न हो सकती है आँखों से पानी या छींकना से लेकर जीवन घातक हो सकती है,जिसे एनाफायलेक्सिस कहा जाता है।
एलर्जी रोगों के आम प्रकार क्या हैं?
कई प्रकार की जनरल एलर्जी कई व्यक्तियों में हो सकती है, जो ये हो सकती है:
• पर्यावरणीय एलर्जी (उदाहरण के लिए धूल के कण से) एक मृदु संवेदनशील श्वासपथ की वजह से एलर्जी रायनाईटिस, ऐसी पर्यावरण एलर्जी का एक और अधिक गंभीर रूप है।
• मौसमी एलर्जी (जैसे हे फीवर में) या बसंत ऋतु की सर्दी (वसंत नेत्रश्लेष्मकलाशोथ) कुछ मौसम में वातावरण में अधिक होने वाले एलर्जी कारकों का ध्यान रखना चाहिये।
• औषध एलर्जी (विशिष्ट उपचार की या दवाओं की प्रतिक्रियायें) इन दवाओं के कुछ घटकों से संवेदनशीलता बढ़ने के कारण।
• खाद्य एलर्जी (जैसे नट्स,ऑयस्टर, दूध उत्पादों आदि)
• कुछ विषाक्त पदार्थों (उदाहरण के लिए मधुमक्खी डंक) से एलर्जी।
• त्वचा की एलर्जी या एक्जिमा एक खुजली होती है जिसे एक एटोपिक डर्मिटाईटिस के रूप में भी जाना जाता है। हालांकि, एटोपिक डर्मिटाईटिस पूरी तरह से एलर्जी की प्रतिक्रिया नहीं है, सौंदर्य प्रसाधन, आभूषण, सिंथेटिक कपड़े, आदि के इस्तेमाल से होने वाली खरोंच है, जो अन्य व्यक्तियों एलर्जी-हे फीवर, अस्थमा या या इन अवस्थाओं के किसी भी पारिवारिक इतिहास में अधिक पाये जाते है।
• अस्थमा एक प्रसिद्ध महत्वपूर्ण श्वसन समस्याओं का विकार है जो फेफड़ों की एक मजबूत एलर्जी के कारण साँस लेने की प्रतिक्रिया के बाद होता है। यह तब होता है जब फेफड़ों कुछ एलर्जी (जैसे को पराग, नए साँचे, पशु बालों में रूसी, या धूल के कण)से संवेदनशील होते हैं। इनके संपर्क से, फेफड़ों की श्वास नलियों में सूजन आ जाती है, संकुचित हो जाती हैं, और व्यक्ति को तुरंत इलाज किया जाने तक साँस लेने में तकलीफ हो जाती है या तो यह स्वतः कम हो जाता है।
एलर्जी रोगों का इलाज कैसे किया जाता है?
• एलर्जी रोगों का रूप में पूरी तरह से आदर्श उपचार व्यवहार जोखिम एलर्जन से बचाव है, जो व्यावहारिक नहीं है हर बार संभव मुश्किल हो सकता है।
• हालांकि, तीव्र एलर्जी एंटी एलर्जी दवाओं के प्रयोग से नियंत्रित की जा सकती है जो रासायनिक हिस्टानिनिक्स का उत्पादन बंद कर देती हैं, जो तथाकथित एलर्जी भड़कना के लिए जिम्मेदार होते हैं।
• अन्य अधिक एलर्जी में अधिक विशिष्ट उपचार और कुछ दवाओं की जरूरत होती है, जैसे मॉस्ट सेल स्टेबलाइजर्स जो रसायनों के उत्पादन में कमी कर इन एलर्जी कारकों को प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संवेदनशील बनाता है।
शरीर एक सुरक्षा व्यवस्था प्रतिरक्षा प्रणाली को ईम्यून सिस्टम कहा जाता है, जो आम तौर पर पर्यावरण से संभावित खतरनाक एंटीजन की प्रविष्टि या शरीर में वृद्धि को सीमित करने की कोशिश में जोखिम प्रतिक्रिया और जीवाणुओं, वायरस आदि संक्रमण को रोकने का कार्य करता है। इस के लिए सुरक्षा कोशिकाओं और रसायनों को छोडता है जो एंटीजन को नष्ट कर सकते हैं।
हालांकि, कई बार इस प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज के साथ एक समस्या है और जो वास्तव में बहुत से एंटीजन की उपस्थिति के लिए अत्यंत अनुभुत की जाती है,खतरनाक है, इसके अलावा शरीर में एक चुभन होती है। परिणामस्वरूप में यदि शरीर में एक सामान्य प्रतिजन भी उत्पन्न होते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली अतिक्रियाशील हो जाती है और नाटकीय ढंग से इन एंटीजन की प्रतिक्रिया पैदा करता है जैसे एक गंभीर जो भी इस तरह शरीर के संपर्क में आने एंटीजन को ट्रिगर करने को नष्ट करने की कोशिश में हो।
इस अप्रत्याशित प्रतिक्रिया को एलर्जी कहा जाता है, और इसकी तीव्रग्राहिता गंभीरता मध्यम प्रतिक्रिया से सूजन तक एक भिन्न हो सकती है आँखों से पानी या छींकना से लेकर जीवन घातक हो सकती है,जिसे एनाफायलेक्सिस कहा जाता है।
एलर्जी रोगों के आम प्रकार क्या हैं?
कई प्रकार की जनरल एलर्जी कई व्यक्तियों में हो सकती है, जो ये हो सकती है:
• पर्यावरणीय एलर्जी (उदाहरण के लिए धूल के कण से) एक मृदु संवेदनशील श्वासपथ की वजह से एलर्जी रायनाईटिस, ऐसी पर्यावरण एलर्जी का एक और अधिक गंभीर रूप है।
• मौसमी एलर्जी (जैसे हे फीवर में) या बसंत ऋतु की सर्दी (वसंत नेत्रश्लेष्मकलाशोथ) कुछ मौसम में वातावरण में अधिक होने वाले एलर्जी कारकों का ध्यान रखना चाहिये।
• औषध एलर्जी (विशिष्ट उपचार की या दवाओं की प्रतिक्रियायें) इन दवाओं के कुछ घटकों से संवेदनशीलता बढ़ने के कारण।
• खाद्य एलर्जी (जैसे नट्स,ऑयस्टर, दूध उत्पादों आदि)
• कुछ विषाक्त पदार्थों (उदाहरण के लिए मधुमक्खी डंक) से एलर्जी।
• त्वचा की एलर्जी या एक्जिमा एक खुजली होती है जिसे एक एटोपिक डर्मिटाईटिस के रूप में भी जाना जाता है। हालांकि, एटोपिक डर्मिटाईटिस पूरी तरह से एलर्जी की प्रतिक्रिया नहीं है, सौंदर्य प्रसाधन, आभूषण, सिंथेटिक कपड़े, आदि के इस्तेमाल से होने वाली खरोंच है, जो अन्य व्यक्तियों एलर्जी-हे फीवर, अस्थमा या या इन अवस्थाओं के किसी भी पारिवारिक इतिहास में अधिक पाये जाते है।
• अस्थमा एक प्रसिद्ध महत्वपूर्ण श्वसन समस्याओं का विकार है जो फेफड़ों की एक मजबूत एलर्जी के कारण साँस लेने की प्रतिक्रिया के बाद होता है। यह तब होता है जब फेफड़ों कुछ एलर्जी (जैसे को पराग, नए साँचे, पशु बालों में रूसी, या धूल के कण)से संवेदनशील होते हैं। इनके संपर्क से, फेफड़ों की श्वास नलियों में सूजन आ जाती है, संकुचित हो जाती हैं, और व्यक्ति को तुरंत इलाज किया जाने तक साँस लेने में तकलीफ हो जाती है या तो यह स्वतः कम हो जाता है।
एलर्जी रोगों का इलाज कैसे किया जाता है?
• एलर्जी रोगों का रूप में पूरी तरह से आदर्श उपचार व्यवहार जोखिम एलर्जन से बचाव है, जो व्यावहारिक नहीं है हर बार संभव मुश्किल हो सकता है।
• हालांकि, तीव्र एलर्जी एंटी एलर्जी दवाओं के प्रयोग से नियंत्रित की जा सकती है जो रासायनिक हिस्टानिनिक्स का उत्पादन बंद कर देती हैं, जो तथाकथित एलर्जी भड़कना के लिए जिम्मेदार होते हैं।
• अन्य अधिक एलर्जी में अधिक विशिष्ट उपचार और कुछ दवाओं की जरूरत होती है, जैसे मॉस्ट सेल स्टेबलाइजर्स जो रसायनों के उत्पादन में कमी कर इन एलर्जी कारकों को प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संवेदनशील बनाता है।
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